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Tuesday, 17 January 2017

उत्तरप्रदेश सहीत पांच राज्यों के चुनावों में "मोदी सरकार" को बदनाम करने के लिए कराया गया था कानपुर रेल हादसा , सामने आया आईएसआई का कनेक्शन ....

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पिछले साल नवंबर के महीने में कानपुर में हुए भीषण ट्रेन हादसे के बारे में बिहार पुलिस ने सनसनीख़ेज़ खुलासा किया है. बिहार पुलिस के मुताबिक कानपुर रेल हादसा असल में आतंकी साज़िश थी, जिसे पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने अंजाम दिया था.

बिहार पुलिस ने मोतिहारी जिले से मोती पासवान नाम के एक शख़्स को गिरफ़्तार किया है. पुलिस के मुताबिक मोती ने कबूल किया है कि उसी ने कानपुर में रेल पटरी को बम धमाके से उड़ाया था. इसके लिए आईएसआई ने उसको नेपाल के रास्ते मोटी रकम भेजी थी. दिल्ली में भी दो आरोपियों को इस मामले में गिरफ़्तार किया गया है. कानपुर के पुखरायां में हुए ट्रेन हादसे में 150 लोग मारे गए थे.




बिहार की पूर्वी चंपारण पुलिस के खुलासे के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पटना-इंदौर ट्रेन और अजमेर-सियालदह ट्रेन  हादसे के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ था ? चंपारण पुलिस  ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि दुबई में बैठे शमसुल होदा ने अपने लोगों के जरिये इन घटनाओं को अंजाम दिया था.

दरअसल, बिहार की पुलिस पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन  में एक अक्टूबर 2016 को रेल पटरी पर मिले बम के मामले की जांच कर रही थी. जांच के दौरान इस मामले में मोती पासवान नामक व्यक्ति की संलिप्तता सामने आयी. मोती से जब पूछताछ हुई तो ये सनसनीखेज खुलासा हुआ. दुबई में बैठे नेपाली कारोबारी शमसुल होदा ने ये साजिश रची थी. उसने नेपाल के अपराधी ब्रजकिशोर गिरी के जरिये पैसा भिजवाया. इसी पैसे से अपराधियों ने रेल पटरियों पर बम लगाया.

पूर्वी चंपारण के एसपी जितेंद्र राणा ( etv pic)
पुलिस ने मोती पासवान से पूछताछ के आधार पर दिल्ली से दो और अपराधियों को धर दबोचा है. हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मोतिहारी पुलिस ज्यादा कुछ बोलने से परहेज कर रही है.
जिले के एसपी जितेंद्र राणा ने कहा कि उमाशंकर पटेल, मोती पासवान, मुकेश यादव को रक्सौल के विभिन्न क्षेत्रों से गिरफ्तार किया गया था. इन तीनों से पूछताछ आधार पर  दो लड़के अरुण राम और  दीपक राम की नेपाल में हत्या के मामले का खुलासा किया गया.





एसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान मोती पासवान ने खुलासा किया है कि पटना-इंदौर रेल हादसे में उसका हाथ था.  नेपाल में बैठे ब्रजकिशोर गिरी ने इसके लिए फंडिंग की थी. नेपाल में ब्रजकिशोर गिरी, मुजाहिर अंसारी, शंभु उर्फ चंडू, गजेद्र शर्मा  और राकेश यादव  को गिरफ्तार किया गया है. इस मामले की जांच की जा रही है.

अरुण राम और दीपक राम की हत्या
पुलिस के अनुसार पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन में रेलवे ट्रैक के पास बम ब्लास्ट होने के पहले खुलासा होने के कारण अरुण राम और दीपक राम की नेपाल में हत्या कर दी थी. जिनका शव नेपाल के जंगल से 20 अक्टूबर को मिला था.  इन दोनों को घोड़ासहन  में बम रखने के लिए तीन लाख रुपये दिये गये थे.

कौन है मोती पासवान?
मोती पासवान पूर्व चंपारण के आदापुर थाना के बखरी गांव का रहने वाला है. अरुण राम और दीपक राम भी इसी गांव के रहने वाले थे.  बखरी गांव  भारत-नेपाल बॉर्डर पर नेपाल बॉर्डर से सटा हुआ गांव है.
मोती पासवान के खिलाफ पूर्वी चंपारण, शिवहर और सीतमाढ़ी में  14 के करीब लूट और हत्या के मामले दर्ज हैं.
कौन है शमसुल होदा?
शमसुल होदा नेपाल का रहनेवाला है और दुबई में बिजनेस करता है. सूत्रों के अनुसार होदा का पाकिस्तान के आईएसआई और दाउद इब्राहिम से भी संबंध है. पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन और कानपुर में इंदौर-पटना रेल एक्सप्रेस के पीछे नेपाली के शमसुल होदा का हाथ है जो ब्रजकिशोर गिरी के जरिए अंजाम देता था.

गौरतलब है कि भारत-नेपार बॉर्डर से ही आतंकवादी यासिन भटकल को गिरफ्तार किया था. 20 नंवबर 2016 को कानपुर के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी. इसमें 153 लोगों की मौत हुई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल थे.



आतंकवाद का मुकाबला करने में दुनिया को भारत की जरूरत समझनी होगी : अमेरिका

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नई दिल्ली :
भारत में अमेरिका के निवर्तमान राजदूत रिचर्ड वर्मा ने आज कहा कि ओबामा प्रशासन ने हाल ही में पाकिस्तान को ‘बहुत कड़ा’ संदेश देते हुए कहा कि वह अपने यहां लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी नेटवर्क की पनाहगाहों को खत्म करे।

पाकिस्तान आधारित आतंकी समूहों से नई दिल्ली को पेश आ रही चुनौती का उल्लेख करते हुए और इस समस्या से निपटने में भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए वर्मा ने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला करने में दुनिया को भारत के नेतृत्व की जरूरत है।




आगामी 20 जनवरी को ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले अपना पद छोड़ने जा रहे रिचर्ड वर्मा ने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तानी नेतृत्व से यह भी कहा है कि वे अफगानिस्तान एवं दूसरे स्थानों पर सीमा पर आतंकवाद के षड्यंत्रकारियों पर सख्ती करें।

आतंकवाद विरोधी प्रयासों में भारत-अमेरिका के सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दो रणनीतिक साझेदारों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था ‘अप्रत्याशित स्तर’ तक पहुंच गई है जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को कई खतरों का नाकाम करने में मदद मिली। वह यहां एक थिंक टैंक की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।





यह पूछे जाने पर कि ओबामा प्रशासन ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी नेटवर्क के बारे में हाल ही में पाकिस्तान से क्या कहा था, तो अमेरिकी राजदूत ने कहा, ‘हमने पाकिस्तानी सरजमीं से गतिविधियां संचालित कर रहे इन आतंकी समूहों को लेकर बहुत सख्त रूख अपनाया है।’

उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद से कहा गया है कि वह इन आतंकी समूहों की की पनाहगाहों को तबाह करे, उनकी सीमा पार गतिविधियों को बंद करे और आतंकवाद के षड्यंत्रकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे।

भारत कभी ऐसा दुस्साहस किया तो हमारी सेना 10 घंटें में दिल्ली पहुच जायेगी : चीन

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चीनी मीडिया
ने फिर एक बार भारत को कम आंकते हुए धमकी दी। डेली पाकिस्तान की खबर के मुताबिक, चीन के एक मीडिया चैनल ने दावा किया कि अगर जंग होगी तो चीनी मोटरयुक्त सैनिकों का दस्ता 48 घंटे में भारत की राजधानी दिल्ली पहुंच जाएगा। वहीं आगे कहा गया है कि अगर सैनिकों की टुकड़ी को पैराशूट की मदद से भेजा गया तो वे केवल दस घंटे में ही दिल्ली पहुंच जाएंगे। हालांकि, चीन की तरफ से भारत को पहली बार धमकी नहीं दी गई है। इससे पहले भी चीनी मीडिया किसी ना किसी मुद्दे पर भारत के खिलाफ आग उगलता रहा है।




अभी हाल में भारत के प्रति बढ़ते बड़ी कंपनियों के रुझान को देखकर चीनी मीडिया चिढ़ गया था। चीनी मीडिया में छपे एक लेख में इस बात का जिक्र किया गया था। दरअसल, एप्पल ने भारत में आकर निवेश करने और यहां पर एक प्लांट बनाने की बात की है। इसपर चीन की नजर पड़ गई। वहां की मीडिया ने चीन को सावधान करते हुए एक लेख लिखा। लेख में लिखा गया कि चीन को जल्द से जल्द अपनी निर्माण क्षमता को बढ़ाना होगा जिससे आगे आने वाले वक्त में उनके वहां उत्पादन के लिए कंपनियों को आकर्षित किया जा सके।






वह लेख ग्लोबल टाइम्स में लिखा गया था। लेख में लिखा था, ‘हो सकता है कि एप्पल आने वाले वक्त में साउथ एशिया के देशों की तरफ मुड़ जाए। इससे चीन पर दबाव बनेगा कि वह अपने घरेलू निर्माण की तकनीकों में तेजी से बदलाव करे। जिससे वह कम लागत में निर्माण करने वाले देशों की टक्कर ले सके।’

' ज्यादा दोस्त होने से आप उनसे बातें करना चाहते हो, लेकिन सबको वक्त दे पाना मुमकिन नहीं है '-बिराट कोहली

                                                                                                                         नई दिल्ली. विराट कोहली ने अपनी शानदार कामयाबी का एक और राज खोला है। उन्होंने कहा, "किस्मत से मेरी लाइफ में ज्यादा करीबी लोग नहीं है, इससे मुझे खेल पर फोकस रखने में मदद मिलती है, ज्यादा दोस्त होने से ध्यान बंट जाता है।" उधर, इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने कोहली को क्रिकेट का क्रिस्टियानो रोनाल्डो कहा है। टाइम मैनेजमेंट में दिक्कत आती है...

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, टीम इंडिया के कप्तान कोहली ने कहा, "लाइफ में ज्यादा करीबी लोगों के होने से मन उनकी तरफ भी लगा रहता है, इससे शोहरत के रास्ते पर आगे बढ़ने वालों को टाइम मैनेजमेंट में दिक्कत आती है।"

- सोमवार को Bcci.tv. को दिए इंटरव्यू में कोहली ने यह भी कहा, "ज्यादा दोस्त और करीबी लोग होने से आप उनसे बातें करना चाहते हो, लेकिन सबको वक्त दे पाना मुमकिन नहीं है, इससे मन भटकता है।"

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कोहली का इंटरव्यू इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने लिया।
मैं खुद को लिमिट में नहीं रखता
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कोहली ने कहा, "एम्बिशन की कोई लिमिट नहीं होनी चाहिए। स्पोर्ट्समैन होने के चलते हम कुछ मौकों पर पहले ही खुद को लिमिट में रखते हैं।"

- "
फील्ड में मैं अपनी काबिलियत खुलकर दिखाना पसंद करता हूं। खेल के बाद टाइम मैनेजमेंट के लिए मैं चीजों को दरकिनार करना शुरू करता हूं।"

- "
लाइफ में मैं जो कुछ करना चाहता हूं, उसके लिए मैं कभी भी कोई लिमिट नहीं रखूंगा।"

सचिन जैसी कामयाबी हासिल करना मुश्किल

-
सचिन तेंडुलकर से कॉम्पैरिजन पर कोहली ने कहा, "पाजी के आंकड़ों तक पहुंचना बहुत मुश्किल होगा।"

- "
मैं इतने लंबे वक्त (24 साल, 200 टेस्ट, 100 वनडे) तक खेलने की बात नहीं सोच सकता।"

- "
ये इनक्रेडिबल नंबर्स हैं और इन्हें हासिल करना मुश्किल होगा, पर मैं अलग करना चाहता हूं। मैं एक अच्छी कामयाबी के साथ खेल छोड़ने में यकीन करता हूं।"

- "2014
के इंग्लैंड टूर में मैं रन बनाने को लेकर दबाव में था, तब पाजी ने ही मुझे अपनी कमियों को दूर करने में मदद की थी।"


नासिर हुसैन ने की कोहली की तारीफ

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विराट कोहली की पुणे में इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में 122 रनों की पारी की नासिर हुसैन ने तारीफ की है।

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हुसैन ने कोहली को क्रिकेट का क्रिस्टियानो रोनाल्डो कहा है।

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बता दें कि रोनाल्डो रीयल मैड्रिड और पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर हैं।


Monday, 16 January 2017

कोई भी मौका स्वाभिमान से बड़ा नहीं होता: प्राची शाह

·         ·      
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                           

     वह पर्दे पर जितनी उम्दा ऐक्ट्रेस हैं, पर्दे के पीछे उतनी ही बेहतरीन कथक डांसर भी हैं। पर्दे पर वह जितनी सहजता से अपने एक्सप्रेशंस बदलती हैं, कथक की अलग-अलग मुद्राओं को पेश करने में भी उतनी ही माहिर हैं। ऐक्टिंग जहां उनके लिए अपना टैलंट दिखाने का जरिया है, वहीं कथक खुद को निखारने का तरीका। ऐक्ट्रेस प्राची शाह पांड्या इन दोनों पहलुओं को काफी बेहतर तरीके से संभालती हैं। क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘कुंडलीऔर इस प्यार को क्या नाम दूंजैसे कई हिट सीरियल्स कर चुकीं ऐक्ट्रेस प्राची शाह स्टूडेंट ऑफ द इयर’, ‘राजा नटवरलालऔर एबीसीडी 2’ जैसी फिल्मों में भी अपना ऐक्टिंग टैलंट दिखा चुकीं हैं। इन दिनों सीरियल स्वाभिमान-एक श्रृंगारसीरियल में एक इंडिपेंडेंट मां का किरदार निभा रहीं प्राची पिछले दिनों सीरियल के प्रमोशन के सिलसिले में लखनऊ पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने अपने कथक प्रेम, ऐक्टिंग के सफर के साथ-साथ कास्टिंग काउच जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा की।


संस्कृति में मिलावट अच्छी नहीं


हाल ही में एक मिनट में सबसे ज्यादा कथक चक्कर लगाने के लिए प्राची का नाम गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। प्राची को भारत सरकार की ओर से कथक ऐम्बैसडर भी बनाया गया है। प्राची भारत सरकारी की ओर से कई देशों में कल्चरल इवेंट्स पर कथक परफॉर्म कर चुकी हैं। मौजूदा दौर में वेस्टर्न डांस के मुकाबले कथक की पोजिशन के बारे में प्राची कहती हैं कि कथक को लेकर लोगों की सीरियसनेस कम हो गई है। इसकी बड़ी वजह आजकल के रिऐलिटी शोज हैं जोकि कथक में भी फ्यूजन की मिलावट करके दर्शकों के सामने पेश करते हैं। प्राची ने कहा, 'कई बार मुझसे भी डांसिंग नंबर्स पर कथक पेश करने के लिए कहा गया, मगर मैंने साफ इनकार कर दिया। मैं तो रिकॉर्डिंग्स पर भी परफॉर्म नहीं करती, जब तक म्यूजिशंस लाइव परफॉर्म नहीं करते। मैंने देखा है कि छोटे-छोटे बच्चे ऊट-पटांग ड्रेसेज में कथक परफॉर्म कर रहे हैं। इसमें बच्चों की नहीं बल्कि उन्हें सिखाने वालों की गलती है।' उन्होंने आगे कहा कि कथक का अपना एक माहौल होता है जिसमें ड्रेस और म्यूजिक की भी अहमियत होती है। उनका मानना है कि अगर एक गणेश जी की मूर्ति है तो आप अपनी क्रिएटिविटी से उसे डेकोरेट कर सकते हैं लेकिन उसका रूप नहीं बदल सकते। उन्होंने कहा, 'हालांकि मैं वेस्टर्न कल्चर के खिलाफ नहीं हूं पर मेरा मानना है कि इसके चलते हमारी संस्कृति में किसी तरह की मिलावट न हो।'
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टीवी में एक ही तरह के रोल हैं


प्राची सीरियल स्वाभिमान...में अपने रोल को काफी चैलेंजिंग बताती हैं लेकिन साथ ही वह यह भी कहती हैं कि आजकल टीवी में मुझे मिलने वाले दस में से नौ रोल एक जैसे होते हैं। ऐसे में एक ऐक्टर के पास दो ही चॉइस होती है, या तो वह उनमें से कोई एक रोल चुन ले, या फिर घर में बैठे। भगवान का शुक्र है कि मेरे पास मेरा डांस ट्रूप है तो मेरे पास ऐक्टिंग के अलावा भी करने को काफी कुछ है लेकिन कई ऐक्टर्स के साथ ऐसा नहीं है। टीवी में मां के रोल मिलने के सवाल पर प्राची कहती हैं कि टीवी के दर्शक आपको जिस रोल में पसंद करते हैं आपको बार-बार वैसे ही रोल ऑफर होते हैं। मैं दो साल बाद टीवी पर वापसी कर रही हूं। इन दो वर्षों में मुझे माइथॉलजी, सुपरनैचुरल, लड़के की मां, लड़की की मां जैसे ही रोल ऑफर हो रहे थे। उनमें से मुझे स्वाभिमान का किरदार जंचा और मैंने इसके लिए हां कह दिया।


करियर का डर डिप्रेस कर देता है

प  महिलाओ पर हो रहे अत्याचार और इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच के सवाल पर प्राची कहती हैं कि ये उन लोगों की बीमार मानसिकता को दिखाता है। इसके अलावा कई बार लड़कियां घरवालों की मर्जी के खिलाफ इस फील्ड में आती हैं। ऐसे में खुद को प्रूव करने और ऐक्टिंग का चांस पाने की जल्दी में भी कुछ लोग कॉम्प्रमाइज कर लेते हैं। हमें इन सब बातों पर ध्यान देना चाहिए। कोई भी मौका आपके स्वाभिमान से बड़ा नहीं होता। इसकी दूसरी वजह यह भी है कि लोग सही वक्त इस तरह की बातों के खिलाफ आवाज नहीं उठाते। अगर सही वक्त पर इसके खिलाफ ऐक्शन लिया जाए तो कास्टिंग काउच करने वालों को न सिर्फ सजा मिलेगी बल्कि बाकी लोगों को भी सबक मिलेगा। मैं पैर्ंट्स से भी यह बात कहना चाहती हूं कि बच्चों पर किसी भी तरह का प्रेशर न डालें। अगर वे ऐक्टिंग करना चाहते हैं तो उन्हें कम से कम एक मौका जरूर दें और उसमें भी उन पर सफल होने का प्रेशर न डालें।वह पर्दे पर जितनी उम्दा ऐक्ट्रेस हैं, पर्दे के पीछे उतनी ही बेहतरीन कथक डांसर भी हैं। पर्दे पर वह जितनी सहजता से अपने एक्सप्रेशंस बदलती हैं, कथक की अलग-अलग मुद्राओं को पेश करने में भी उतनी ही माहिर हैं। ऐक्टिंग जहां उनके लिए अपना टैलंट दिखाने का जरिया है, वहीं कथक खुद को निखारने का तरीका। ऐक्ट्रेस प्राची शाह पांड्या इन दोनों पहलुओं को काफी बेहतर तरीके से संभालती हैं। क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘कुंडलीऔर इस प्यार को क्या नाम दूंजैसे कई हिट सीरियल्स कर चुकीं ऐक्ट्रेस प्राची शाह स्टूडेंट ऑफ द इयर’, ‘राजा नटवरलालऔर एबीसीडी 2’ जैसी फिल्मों में भी अपना ऐक्टिंग टैलंट दिखा चुकीं हैं। इन दिनों सीरियल स्वाभिमान-एक श्रृंगारसीरियल में एक इंडिपेंडेंट मां का किरदार निभा रहीं प्राची पिछले दिनों सीरियल के प्रमोशन के सिलसिले में लखनऊ पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने अपने कथक प्रेम, ऐक्टिंग के सफर के साथ-साथ कास्टिंग काउच जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा की।


संस्कृति में मिलावट अच्छी नहीं


हाल ही में एक मिनट में सबसे ज्यादा कथक चक्कर लगाने के लिए प्राची का नाम गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। प्राची को भारत सरकार की ओर से कथक ऐम्बैसडर भी बनाया गया है। प्राची भारत सरकारी की ओर से कई देशों में कल्चरल इवेंट्स पर कथक परफॉर्म कर चुकी हैं। मौजूदा दौर में वेस्टर्न डांस के मुकाबले कथक की पोजिशन के बारे में प्राची कहती हैं कि कथक को लेकर लोगों की सीरियसनेस कम हो गई है। इसकी बड़ी वजह आजकल के रिऐलिटी शोज हैं जोकि कथक में भी फ्यूजन की मिलावट करके दर्शकों के सामने पेश करते हैं। प्राची ने कहा, 'कई बार मुझसे भी डांसिंग नंबर्स पर कथक पेश करने के लिए कहा गया, मगर मैंने साफ इनकार कर दिया। मैं तो रिकॉर्डिंग्स पर भी परफॉर्म नहीं करती, जब तक म्यूजिशंस लाइव परफॉर्म नहीं करते। मैंने देखा है कि छोटे-छोटे बच्चे ऊट-पटांग ड्रेसेज में कथक परफॉर्म कर रहे हैं। इसमें बच्चों की नहीं बल्कि उन्हें सिखाने वालों की गलती है।' उन्होंने आगे कहा कि कथक का अपना एक माहौल होता है जिसमें ड्रेस और म्यूजिक की भी अहमियत होती है। उनका मानना है कि अगर एक गणेश जी की मूर्ति है तो आप अपनी क्रिएटिविटी से उसे डेकोरेट कर सकते हैं लेकिन उसका रूप नहीं बदल सकते। उन्होंने कहा, 'हालांकि मैं वेस्टर्न कल्चर के खिलाफ नहीं हूं पर मेरा मानना है कि इसके चलते हमारी संस्कृति में किसी तरह की मिलावट न हो।'
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टीवी में एक ही तरह के रोल हैं

प्राची सीरियल स्वाभिमान...में अपने रोल को काफी चैलेंजिंग बताती हैं लेकिन साथ ही वह यह भी कहती हैं कि आजकल टीवी में मुझे मिलने वाले दस में से नौ रोल एक जैसे होते हैं। ऐसे में एक ऐक्टर के पास दो ही चॉइस होती है, या तो वह उनमें से कोई एक रोल चुन ले, या फिर घर में बैठे। भगवान का शुक्र है कि मेरे पास मेरा डांस ट्रूप है तो मेरे पास ऐक्टिंग के अलावा भी करने को काफी कुछ है लेकिन कई ऐक्टर्स के साथ ऐसा नहीं है। टीवी में मां के रोल मिलने के सवाल पर प्राची कहती हैं कि टीवी के दर्शक आपको जिस रोल में पसंद करते हैं आपको बार-बार वैसे ही रोल ऑफर होते हैं। मैं दो साल बाद टीवी पर वापसी कर रही हूं। इन दो वर्षों में मुझे माइथॉलजी, सुपरनैचुरल, लड़के की मां, लड़की की मां जैसे ही रोल ऑफर हो रहे थे। उनमें से मुझे स्वाभिमान का किरदार जंचा और मैंने इसके लिए हां कह दिया।

करियर का डर डिप्रेस कर देता है

महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच के सवाल पर प्राची कहती हैं कि ये उन लोगों की बीमार मानसिकता को दिखाता है। इसके अलावा कई बार लड़कियां घरवालों की मर्जी के खिलाफ इस फील्ड में आती हैं। ऐसे में खुद को प्रूव करने और ऐक्टिंग का चांस पाने की जल्दी में भी कुछ लोग कॉम्प्रमाइज कर लेते हैं। हमें इन सब बातों पर ध्यान देना चाहिए। कोई भी मौका आपके स्वाभिमान से बड़ा नहीं होता। इसकी दूसरी वजह यह भी है कि लोग सही वक्त इस तरह की बातों के खिलाफ आवाज नहीं उठाते। अगर सही वक्त पर इसके खिलाफ ऐक्शन लिया जाए तो कास्टिंग काउच करने वालों को न सिर्फ सजा मिलेगी बल्कि बाकी लोगों को भी सबक मिलेगा। मैं पैर्ंट्स से भी यह बात कहना चाहती हूं कि बच्चों पर किसी भी तरह का प्रेशर न डालें। अगर वे ऐक्टिंग करना चाहते हैं तो उन्हें कम से कम एक मौका जरूर दें और उसमें भी उन पर सफल होने का प्रेशर न डालें।

डॉक्टरों का कमाल, यूं निकाल दी लिवर में घुसी गोली

                                                                                   हैदराबाद 

डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और हुनर से लिवर में घुसी गोली 45 मिनट की जद्दोजहद के बाद सफलतापूर्वक बाहर निकाल दी। दरअसल एक सोमालियन नागरिक के जंग के दौरान यह गोली उसके लिवर तक जा पहुंची थी। शहर के अपोलो अस्पताल में युवक की सर्जरी की गई, जिसे 45 मिनट के भीतर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

50 वर्षीय महमूद सोमालिया में पिछले साल क्रॉसफायर के दौरान गोली लगने से घायल हो गए थे। 9 महीने तक उनका इलाज चला, फिर वह शहर आ गए। अपोलो अस्पताल के सीनियर डॉक्टर पी सिवा चरन रेड्डी और उनकी टीम ने 5x2 cm की गोली सर्जरी कर उनके लिवर से बाहर निकाल दी।रेड्डी ने बताया
, 'महमूद अपने देश में यह सर्जरी करवाने वाले थे, जिसमें उनके पेट व लिवर के एक हिस्से को काटकर ऑपरेशन किया जाना था। यह काफी जोखिम भरा था, हमने गोली बाहर निकालने को लैपारोस्को पिक सर्जरी को अंजाम दिया।'तकनीक के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, 'हमने दो पेट के एक हिस्से में दो 0.5 cm के होल किए, फिर गोली की सटीक लोकेशन पता लगाकर उसे निकाला। सर्जरी के दौरान खून भी ज्यादा नहीं बहने दिया। कोई जख्म नहीं हुए और मरीज को 24 घंटे के भीतर डिस्चार्ज कर दिया गया।'

वह बोले, 'अगर यही काम ओपन सर्जरी के जरिए किया जाता, तो इसमें जख्म भी काफी रह जाते और ब्लड लॉस भी होता। इस सर्जरी के बाद 24 घंटे पूरे होते ही मरीज डिस्चार्ज होकर अपने देश चला गया।'

बीजेपी चीफ हुए नाराज दिया इस्तीफा..........


ABT-VIJAY SAMPLA
देश में चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है , सियासी अटकले तेज होते जा रही है l खबर पंजाब से है,पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की दूसरी लिस्ट आने के बाद पार्टी में विवाद शुरू हो गया है. प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष विजय सांपला ने लिस्ट में शामिल कुछ नामों पर ऐतराज जाहिर किया है. सूत्रों के अनुसार, अपनी नाराजगी जताने के लिए सांपला ने केंद्रीय नेतृत्व को इस्तीफा भेजा है. सांपला ने राज्य सरकार में कैबिनेट पद छोड़ने की भी पेशकश की है. इसके बाद अमित शाह ने सांपला को दिल्ली बुलाया है. मंगलवार को सांपला दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं. सांपला जालंधर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं. दिल्ली में वे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और अन्य नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं.
सांपला टिकटों के बंटवारे में उनकी सलाह को नजरअंदाज किए जाने से नाराज हैं. सोमवार को जारी लिस्ट में बीजेपी ने अमृतसर (नॉर्थ), फगवाड़ा, जालंधर (वेस्ट), जालंधर (सेंट्रल), आनंदपुर साहिब और फजिल्का सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे.
खबरों के मुताबिक जालंधर (वेस्ट) और फगवाड़ा से सांपला के मनपसंद उम्मीदवारों को पार्टी ने मौका नहीं दिया. फगवाड़ा में उनके विरोधी माने जाने उम्मीदवार को उतारा गया है.

भगत सिंह के बारे में कुछ अनोखी जानकारी....

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ABT - Bhagat Singh .

मेरी कलम भी बाकिफ है ,मेरे जज्बातों से ,मै इश्क भी लिखना चाहू तो इन्कलाब लिखा जाता है :   " भगत सिंह" 


मित्रों आज हम इस पोस्ट के माध्यम से  अपनी भारत माता के सच्चे सपूत सरदार भगत सिंह जी के  बारे में कुछ महत्वपूर्ण बाते जानेंगे l
करतार सिंह सराभा और लाला लाजपत राय से हुए थे प्रभावित....
भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था। भगत सिंह का परिवार एक आर्य-समाजी सिख परिवार था।   उस समय उनके चाचा अजीत सिंह और श्‍वान सिंह भारत की आजादी में अपना सहयोग दे रहे थे। ये दोनों करतार सिंह सराभा द्वारा संचालित गदर पाटी के सदस्‍य थे। भगत सिंह पर इन दोनों का गहरा प्रभाव पड़ा था। इसलिए ये बचपन से ही अंग्रेजों से घृणा करने लगे थे।  भगत सिंह करतार सिंह सराभा और लाला लाजपत राय से अत्यधिक प्रभावित थे। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के बाल मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला।
पढ़ाई छोर आन्दोलन में कूद पड़े.....
 लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर  भगत सिंह ने 1920 में भगत सिंह महात्‍मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे अहिंसा आंदोलन में भाग लेने लगे, जिसमें गांधी जी विदेशी समानों का बहिष्कार कर रहे थे। 14 वर्ष की आयु में ही भगत सिंह ने सरकारी स्‍कूलों की पुस्‍तकें और कपड़े जला दिए। इसके बाद इनके पोस्‍टर गांवों में छपने लगे। 
भगत सिंह पहले महात्‍मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन और भारतीय नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्‍य थे। 1921 में जब चौरा-चौरा हत्‍याकांड के बाद गांधीजी ने किसानों का साथ नहीं दिया तो भगत सिंह पर उसका गहरा प्रभाव पड़ा

 चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्‍व में गठित हुई गदर दल के हिस्‍सा बन गए....
उसके बाद चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्‍व में गठित हुई गदर दल के हिस्‍सा बन गए। उन्‍होंने चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। 9 अगस्त, 1925 को शाहजहांपुर से लखनऊ के लिए  चली 8 नंबर डाउन पैसेंजर से काकोरी नामक छोटे से स्टेशन पर सरकारी खजाने को लूट लिया गया। यह घटना काकोरी कांड नाम से इतिहास में प्रसिद्ध है।  इस घटना को अंजाम भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और प्रमुख क्रांतिकारियों ने साथ मिलकर अंजाम दिया था। काकोरी कांड के बाद अंग्रेजों ने हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के क्रांतिकारियों की धरपकड़ तेज कर दी और जगह-जगह अपने एजेंट्स बहाल कर दिए। भगत सिंह और सुखदेव लाहौर पहुंच गए। वहां उनके चाचा सरदार अजीत  सिंह ने एक खटाल खोल दिया और कहा कि अब यहीं रहो और दूध का कारोबार करो। वे भगत सिंह की शादी कराना चाहते थे और एक बार लड़की वालों को भी लेकर पहुंचे थे। भगतसिंह कागज-पेंसिल ले दूध का हिसाब करते, पर कभी हिसाब सही मिलता नहीं। सुखदेव खुद ढेर सारा दूध पी जाते और दूसरों को भी मुफ्त पिलाते।
 आजाद को आता था भगत सिंह पर गुस्सा....... 
भगत सिंह को फिल्में देखना और रसगुल्ले खाना काफी पसंद था। वे राजगुरु और यशपाल के साथ जब भी मौका मिलता था, फिल्म देखने चले जाते थे। चार्ली चैप्लिन की फिल्में बहुत पसंद थीं। इस पर चंद्रशेखर आजाद बहुत गुस्सा होते थे।
भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अफसर जेपी सांडर्स को मारा था। इसमें चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। क्रांतिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने अलीपुर रोड दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेंट्रल असेंबली के सभागार में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिये बम और पर्चे फेके थे l
क्रांतिकारी ही नही बल्कि कलम के भी धनी व्यक्ति थे ...
भगत सिंह क्रांतिकारी देशभक्त ही नहीं बल्कि एक अध्ययनशीरल विचारक, कलम के धनी, दार्शनिक, चिंतक, लेखक, पत्रकार और महान मनुष्य थे। उन्होंने 23 वर्ष की छोटी-सी आयु में फ्रांस, आयरलैंड और रूस की क्रांति का  विषद अध्ययन किया था।
हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, पंजाबी, बंगला और आयरिश भाषा के मर्मज्ञ चिंतक और विचारक भगतसिंह भारत में समाजवाद के पहले व्याख्याता थे। भगत सिंह अच्छे वक्ता, पाठक और लेखक भी थे। उन्होंने 'अकाली' और 'कीर्ति' दो अखबारों का संपादन भी किया।   जेल में भगत सिंह ने करीब दो साल रहे। इस दौरान वे लेख लिखकर अपने क्रांतिकारी विचार व्यक्त करते रहे। जेल में रहते हुए उनका अध्ययन बराबर जारी रहा। उस दौरान उनके लिखे गए लेख व परिवार को लिखे गए पत्र आज भी  उनके विचारों के दर्पण हैं।  
अपने लेखों में उन्होंने कई तरह से पूंजीपतियों को अपना शत्रु बताया है। उन्होंने लिखा कि मजदूरों का शोषण करने वाला चाहें एक भारतीय ही क्यों न हो, वह उनका शत्रु है। उन्होंने जेल में अंग्रेज़ी में एक लेख भी लिखा जिसका शीर्षक था 'मैं नास्तिक क्यों हूं'? जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने 64 दिनों तक भूख हड़ताल की। उनके एक साथी यतीन्द्रनाथ दास ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण ही त्याग दिए थे। 
मौत थी नजदीक और पढ़ रहे थे जीवनी .....
23 मार्च 1931 को भगत सिंह तथा इनके दो साथियों सुखदेव व राजगुरु को फांसी दे दी गई। फांसी पर जाने से पहले वे 'बिस्मिल' की जीवनी पढ़ रहे थे जो सिंध (वर्तमान पाकिस्तान का एक सूबा) के एक प्रकाशक भजन लाल बुकसेलर ने आर्ट प्रेस, सिंध से छापी थी।    


' गुफा को अब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है ताकि वे दर्शन कर सकें.’’ विश्व प्रसिद्ध वैष्णोदेवी मंदिर में

                                                                                                                                  ‘‘जम्मू: जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में हिमालय की त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित विश्व प्रसिद्ध

 वैष्णोदेवी मंदिर (Vaishno Devi Temple) की पुरानी और प्राकृतिक गुफा को आज श्रद्धालुओं के


 
श्रीमाता वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड (Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board - SMVDSB) के अतिरिक्त

 मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीयूष सिंगला ने कहा, ‘‘गुफा को अब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोल

 दिया गया है ताकि वे दर्शन कर सकें.’’ श्रद्धालुओं को परेशानी से बचाने के लिए एसडीएम भवन को

 इसके लिए अधिकृत किया गया है कि वह भीड़ को मद्देनजर रखते हुए पुरानी गुफा से दर्शन को

 नियंत्रित करें.



 
उन्होंने कहा कि पुरानी गुफा जनवरी और फरवरी के महीने में ही खोली जाती है, जब भीड़ कम होती है, जबकि बाकी के महीनों के दौरान श्रद्धालुओं को गर्भगृह पहुंचने के लिए नवनिर्मित गुफा से गुजरना पड़ता है.
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