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Tuesday, 24 February 2015

भूमि अधिग्रहण बिल पर सरकार को मिला शिवसेना का साथ


नयी दिल्ली : विपक्ष के विरोध व वाकआउट के बीच सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पेश किया. यह बिल पिछले साल दिसंबर में लाये गये अध्यादेश की जगह लेगा. इसके जरिये यूपीए सरकार द्वारा बनाये गये कानून में संशोधन किया जाना है. विपक्ष ने इसे किसान विरोधी बताते हुए कहा कि सभी दलों के साथ सलाह के बाद ही सदन में पेश किया जाना चाहिए.

वहीं दूसरी ओर मीडिया में चल रही खबर की माने तो शिवसेना के मंत्री अनंत गीते ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण विधेयक पर आयोजित बैठक का उनकी पार्टी ने बहिष्कार नहीं किया है.  गीते लोकसभा में शिवसेना के दल नेता भी हैं. उन्होंने बताया कि शिवसेना के प्रतिनिधि के तौर पर सांसद गजानन कीर्तिकर, विनायक राऊत, अरविंद सावंत, रवी गायकवाड, राहुल शेवाले बैठक में मौजूद थे. इससे पहले खबर थी कि भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना ने इस बिल का विरोध किया है.

इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक कहा कि विधेयक पर पीछे हटने का सवाल ही नहीं है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने जैसे ही ‘‘भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार संशोधन विधेयक 2015’’ को पेश करने की लोस अध्यक्ष से अनुमति मांगी पूरा विपक्ष खड़े होकर इसका विरोध करने लगा. कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस, राजद, आम आदमी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों के सदस्य अध्यक्ष के आसन के निकट आ गये और विरोध करने लगे. संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने विपक्षी सदस्यों को राजी कराने का प्रयास करते हुए कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह से किसानों के हित में है. सरकार  विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा के लिए तैयार है, पर विपक्ष नहीं माना.


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