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Friday, 4 December 2015

सुशासन बाबू का यू-टर्न : चुनाव पूर्व पूर्ण-शराबबंदी का किया था वादा , अब सताने लगी है राजश्व घाटे की चिंता ..... पूर्ण रूप से नहीं लगेगा शराब पर पाबंदी , सिर्फ देशी शराब पर लगेगा पाबंदी :p :p

पटना : बिहार में पूर्ण शराबबंदी की घोषणा पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यू-टर्न ले सकते हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने उन्हें सलाह दी है कि शराबबंदी का दायरा देसी शराब तक ही सीमित रखना संभव है। राजस्व विभाग के अधिकारी इसके पीछे 5,500 करोड़ रूपये के राजस्व घाटे का तर्क दे रहे हैं।
विभाग का सुझाव है कि सरकार केवल देसी शराब पर ही प्रतिबंध लगाए।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अगले साल एक अप्रैल से राज्य में पूरी तरह से शराबबंदी की बात कही थी, लेकिन राजस्व विभाग के तर्कों को अगर तवज्जो दी जाती है तो विदेशी शराब का बिकना जारी रहेगा। हालांकि विदेशी शराब पर एक्साइज डयूटी जरूर बढ़ने जा रही है, जिससे यह महंगी हो जाएगी और आम लोगों के लिए इसे खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
बता दें कि अपने चुनावी वादे को पूरा करने की बात करते हुए नीतीश कुमार ने ऎलान किया था कि वह शराबबंदी करने जा रहे हैं। इसके लिए तारीख 1 अप्रैल, 2016 भी तय कर दी गई थी, लेकिन अब यह कहा जा रहा है कि सिर्फ देसी शराब पर ही प्रतिबंध लगाया जा रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंध का दायरा देसी शराब तक सीमित हो सकता है। राजस्व विभाग के अधिकारी इसके पीछे 5,500 करोड रूपये के राजस्व घाटे का तर्क दे रहे हैं।
राजस्व और एक्साइज विभाग के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि पहले देसी शराब पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है और बाद में आर्थिक आकलन करने के बाद संभव हुआ तो विदेशी शराब पर भी बैन के बारे में सोचा जा सकता है। राज्य को विदेशी शराब (आईएमएफएल) से 2,500 करोड़ रूपये का एक्साइज और वैट से 1000 करोड़ रूपये मिलता है।
देसी शराब का एक्साइज 1500 करोड़ रूपये है। इस तरह शराब की बिक्री से कुल एक्साइज राजस्व लगभग 4000 करोड़ रूपये और वैट से 1500 करोड़ रूपये है। विदेशी शराब को प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखने के हिमायती एक एक्साइज अधिकारी ने कहा कि भले ही इसकी खपत कुल खपत की एक तिहाई है, लेकिन इसका राजस्व दो-तिहाई है।

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