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Friday, 22 April 2016

पानी बचाने की मुहिम के तहत एम्स के ट्रामा सेंटर ने नया प्रयोग किया।

पानी बचाने की मुहिम के तहत एम्स के ट्रामा सेंटर ने नया प्रयोग किया। जिसके लिए ट्रामा सेंटर की छत पर एक ऐसा संयत्र लाया गया जिसकी मदद से एक जगह इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को कई काम में लाया जा सका। चार चरण से होते हुए पानी का सबसे अंतिम इस्तेमाल गार्डन में किया गया। ट्रामा सेंटर में रोजाना 80 एमजीडी पानी की जरूरत होती है। छह महीने तक पायलेट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किए गए इस संयत्र की मदद से 12 एमजीडी पानी बचाया गया। अगले चरण में ट्रामा सेंटर इसे सभी प्रमुख इमारतों में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
पानी बचाने के लिए एम्स ट्रामा सेंटर की छत पर 100 मीटर की जगह पर संयत्र को स्थापित किया गया। जहां से ट्रामा सेंटर की रसोई, वार्ड, ओटी, लैबोरेटरी सहित पौधों को पानी की आपूर्ति की जाती है। गो ग्रीन अस्पताल मुहिम के तहत एक निजी कंपनी को जल संरक्षण का जिम्मा सौंपा गया और कंपनी ने एक ही पानी को तीन जगहों से होते हुए इस्तेमाल करने पर सफलता पाई।
एम्स सहित सफदरजंग और ट्रामा सेंटर में पानी की आपूर्ति सफदरजंग स्थित रैनीवेल से होती है, लेकिन संयंत्र लगने के बाद पानी को सीधे प्लांट से सीधे वार्ड और ओटी तक नहीं पहुंचाया जाता है। ओटी में पहुंचने से पहले पानी का इस्तेमाल लांड्री में होता है, वही ओटी के बाद कूलिंग से एकत्र हुए पानी को एसी प्लांट और किचन में भेजा गया।
एम्स ट्रामा सेंटर के प्रभारी डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि जल संरक्षण के तहत निजी कंपनी को मौका दिया गया, जिसमें ओटी और एसी प्लांट से निकलने वाले भांप से बने पानी को किचन के रोजाना काम के लिए प्रयोग किया गया। जबकि किचन से निकलने वाले पानी को गार्डन और पेड़ पौधों के लिए दोबारा फिर प्रयोग किया गया। ट्रामा सेंटर के प्रस्तावित पांचवें चरण के विकास कार्य में प्रमुख इमारतों पर जल संरक्षण संयंत्र लगाया जाएगा।
कैसे हुआ एक ही पानी का चार जगह इस्तेमाल
- रेनीवैल के जरिए संयंत्र में पहुंचे पानी को एक ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए साफ किया गया। यहां से सबसे पहले पानी को लांड्री में पहुंचाया गया, ट्रामा सेंटर रोजाना 80 एमजीडी पानी लांड्री में प्रयोग होता है, यहां पानी को संरक्षित कर गरम किया गया।
- दूसरे चरण में गरम पानी से निकली हुई भांप को एसी प्लांट के लिए पाइप के जरिए हस्तांतरित किया गया।
- जबकि तीसरे चरण में ठंडे हुए पानी को किचन के लिए इस्तेमाल किया गया।
- किचन में इस्तेमाल के बाद उसी पानी को पौधों के लिए प्रयोग किया गया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जल संरक्षण विशेषज्ञ एस ए नकवी ने कहा, "वर्षा जल संचयन योजना के तहत सभी सरकारी अस्पतालों को जल संचयन और जल को दोबारा इस्तेमाल (रिसाइकिलिंग) करने की योजना पर काम करना चाहिए, क्योंकि अस्पतालों में सबसे अधिक पानी का इस्तेमाल होता है। इसके लिए अस्पतालों को पानी की आपूर्ति करने वाली पाइप लाइन को अलग रंग देने चाहिए, जिससे पता लगाया जा सके कि किस पाइप लाइन में रिसाइकिल पानी है और किसमें सामान्य।"
आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर अरविंद कुमार नीमा कहते हैं,"आईआईटी दिल्ली ने अस्पतालों में जल-संरक्षण के लिए अभी तक किसी प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया है, लेकिन ग्रो ग्रीन अस्पताल के तहत जल संचय के लिए कुछ अस्पतालों में लेक्चर दिए गए हैं। कई कंपनियां अच्छे प्रोजेक्ट को लाने की इच्छुक है जिसमें अस्पताल के जैविक कचरा प्रबंधन सहित जल संचयन तकनीक पर दोबारा काम किया जा सके।"

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