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Thursday, 21 April 2016

समझौता धमाके में लश्कर का हाथ, लेकिन कांग्रेस ने वोटबैंक की राजनीति के कारण , हिन्दू आतंकवाद को सिद्ध करने के लिए रची साजिश

नई दिल्ली। समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में जो खुलासे हो रहे हैं वो बेहद चौंकाने वाले हैं। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस ने जहां राजनीतिक विद्वेष की भावना के साथ भाजपा और आर.स.एस को आंतकवाद जैसे मामले में निशाना बनाया वहीं, उसने भारत राष्ट्र की अस्मिता के साथ पूरा खिलवाड़ किया।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 2007 के समझौता ब्लास्ट में पाकिस्तानी आंतकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के फायनेंसर आरिफ कासमानी का हाथ था। इस संबंध में अब एनआईए ने जांच की दिशा पूरी तरह से बदल दी है। इस हमले में अधिक जानकारी जुटाने के लिए अमेरिका से मदद मांगी जा रही है। एनआईए महानिदेशक शरद कुमार ने अखबार को बताया कि मामले में लश्कर का हाथ होने को लेकर अमेरिका से जानकारी मांगी गई है।

हाल ही में अमेरिका गए शरद ने म्युचुअल लीगल एसिसटेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत आरिफ के संबंध में सूचनाएं मांगी हैं। उल्लेखनीय है कि 2007 में समझौता ब्लास्ट के बाद कांग्रेस और कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने देश में भगवा या हिंदू आतंकवाद का मुद्दा उठा दिया था। खुद तत्कालीन कांग्रेस के गृहमंत्री हिन्दू आतंकवाद की बात कहते रहे।

इसे लेकर आरएसएस से जुड़े संगठनों के कई कार्यकर्ताओं को पकड़ा गया। उनमें से कुछ तो छुट गए हैं और कुछ अभी जेल में हैं। इस मामले में हालांकि, एनआईए को पहले से हो रहे जांच पर था। कई एसे लोग थे जिनका इस मामले से कोई लेना–देना नहीं था पर उन्हें इस मामले से जोड़ा जा रहा था। यह ठीक वैसे ही था जैसे इशरत जहां के मामले में तत्कालीन गृहमंत्री खुद और जांच एजेंसियां कांग्रेस के इशारे पर सबूतों को बदल रही थी। सरकारी कागजातों में छेड़छाड़ किए जा रहे थे। यहां तक की कोर्ट में पेश करने को शपथ पत्र तक बदले गए। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2007 में हुए समझौता ट्रेन ब्लास्ट में 68 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकांश पाकिस्तानी नागरिक थे। और सबसे अहम बात यह कि कांग्रेस की इस करतूत से पाकिस्तना को इस मामले में देश पर हमला बोलने का मौका मिला। यह बेहद शर्म की बात है कि विस्फोट में शामिल एक कुख्यात आंतकी संगठन ‘लश्कर’ को बचाने का काम किया गया। ............................................ श्रोत : रिपोर्ट4इंडिया

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