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Wednesday, 11 May 2016

बिहार इंटर साइंस रिजल्ट के एक दिन बाद , नाराज छात्रों का हंगामा, तोड़फोड़ ......



पटना : इंटर साइंस का रिजल्ट निकले 24 घंटे भी नहीं हुए कि इंटर काउंसिल में हंगामा शुरू हो गया. रिजल्ट से नाराज छात्रों ने बुधवार को सुबह 11 बजे से ही काउंसिल के गेट पर  नारेबाजी और हंगामा करना शुरू कर दिया. हंगामा कई घंटों तक चलता रहा. इस बीच छात्रों ने काउंसिल के बाहर सड़क जाम भी किया. छात्रों का कहना है कि  इस बार रिजल्ट में काफी गड़बड़ी हुई है. यह कैसे ठीक होगा, इसे बताने के लिए इंटर काउंसिल में कोई नहीं है.

कोई छात्र एक विषय में फेल तो कोई दो में फेल हो गया है. कई रिजल्ट तो  ऐसे भी हैं जिनमें छात्र को एक भी अंक प्राप्त नहीं है. पूरा का पूरा  मार्क्स सीट ही खाली है. 12 बजे के बाद छात्रों का विरोध- प्रदर्शन इतना ज्यादा हो गया कि पुलिस बल को बुलाना पड़ा. बिहार पुलिस और सैफ के जवान ने छात्रों  को खदेड़ा. हंगामे के कारण काउंसिल के सभी गेट बंद कर दिये गये . स्थिति को देखते हुए काउंसिल में सैफ जवानों की तैनाती भी की गयी . 

प्रदर्शन कर रहे छात्र तारामंडल होते हुए डाकबंगला तक गये. कोतवाली के पास उन्हें रोक दिया गया. इसके बाद छात्र फिर इंटर काउंसिल के पास जमा हो गये. छात्रों के प्रदर्शन के कारण सड़क पर जाम की स्थिति बन गयी थी. छात्रों ने काउंसिल कैंपस में रखे गमलों को तोड़ दिया. पुलिस ने छात्राओं पर भी लाठी चार्ज किया.

छात्रों की शिकायत : स्क्रूटनी के लिए आखिर कहां जाएं

हंगामा कर रहे छात्र को स्क्रूटनी को लेकर सबसे ज्यादा शिकायते हैं. छात्रों का कहना है कि वे आखिर कहां जायें. स्क्रूटनी का आवेदन स्कूलवाले नहीं ले रहे हैं. स्कूल में आवेदन जमा करने गये थे, लेकिन स्कूलवालों ने काउंसिल भेज दिया. काउंसिल में आवेदन जमा करने आये  तो यहां पर आवेदन नहीं लिया जा रहा है. यह समस्या  एक छात्र की नहीं, बल्कि सैकड़ों छात्रों की है.

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष प्रो लालकेश्वर प्रसादि िसंह ने बताया िक कदाचार मुक्त परीक्षा ली गयी है. इस कारण रिजल्ट में पास करने वाले छात्र कम है. जिन छात्रों के रिजल्ट में गड़बड़ी है, वो स्क्रूटनी के लिए आवेदन करें, सभी का रिजल्ट ठीक हो जायेगा. 

जेइइ मेन में अच्छे मार्क्स, इंटर में फेल

इंजीनियरिंग और मेडिकल की एंट्रेंस परीक्षा पास कर चुके कई छात्रों का भी  रिजल्ट गड़बड़ा गया है. डीएवी, बीएसइबी के छात्र नीतीश कुमार को जेइइ मेन में ओबीसी केटेगरी में 150 मार्क्स मिले हैं. वह बिहार इंजीनियरिंग के पीटी में भी क्वालिफाइ कर गया है. लेकिन इंटर में केमेस्ट्री में वह फेल हो गया.

इसी प्रकार सर्वोदय प्लस टू भोजपुर के छात्र अंबर कुमार के साथ भी ऐसा ही हुआ. अंबर कुमार को जेइइ मेन में 142 अंक प्राप्त हुए हैं. लेकिन इंटर में मैथ में वह फेल हो गया. 

नवादा के छात्र को केमेस्ट्री में 2001 अंक

रिजल्ट में किस कदर लापरवाही बरती गयी है इसका पता इंटर स्कूल, खजवारा, नवादा के छात्र अभिषेक के रिजल्ट से चलता है. अभिषेक को फिजिक्स और मैथ में 70 और 75 अंक प्राप्त हुए हैं. लेकिन केमेस्ट्री में उसे गलती से 2001 अंक दे िदया गया.
सरकारी स्कूल निजी पर भारी, बस थोड़ा ध्यान दे सरकार, बदल जायेगी तसवीर 

पटना : इंटर साइंस के रिजल्ट में सरकारी स्कूल निजी स्कूलों पर भारी पड़ गये. मंगलवार को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा जारी रिजल्ट के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की प्रतिभा चमक-दमक वाले अंगरेजी स्कूलों के बच्चों के मुकाबले कहीं अधिक है. 

विज्ञान के विषयों में शिक्षक और  कम संसाधनों के बावजूद सरकारी स्कूलों  का प्रदर्शन प्राइवेट स्कूलों की तुलना में बेहतर रहा है. गणित में जहां प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले 28 प्रतिशत बच्चों को शून्य अंक आया है. इसके मुकाबले सरकारी स्कूलों के  मात्र 21 प्रतिशत बच्चे ही  शून्य अंक  लाये.  

पटना जहां बेहतर संसाधनों वाले निजी स्कूल स्थित हैं, वहां गणित विषय में 79.07 प्रतिशत बच्चे पास हुए. जबकि, कम संसाधनों में पढ़ने वाले सरकारी स्कूलों के 82 प्रतिशत छात्रों ने गणित में सफलता पायी है. गणित विषय में भागलपुर और मुजफ्फरपुर जिले की स्थिति भी इसी प्रकार है. इसी प्रकार भौतिकी में भी बिना लैब और उपकरण के सरकारी स्कूलों के छात्रों ने निजी स्कूलों के छात्रों को पीछे छोड़ दिया है.  निजी स्कूलों के 0.39 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को शून्य अंक आया.  जबकि, उनके मुकाबले सरकारी स्कूलों के 0.33 प्रतिशत बच्चे ही शून्य अंक वाले रहे. पटना जिले में  सरकारी स्कूलों के 80.69 प्रतिशत बच्चे फिजिक्स  में सफलता पायी. 

उनके मुकाबले निजी स्कूलों के 70.06 प्रतिशत बच्चे ही सफल हुए. राज्य के दूसरे बड़े व्यापारिक शहर मुजफ्फरपुर में भी कमोवेश यही स्थिति  पायी गयी है. यहां भी फिजिक्स विषय में सरकारी स्कूलों के बच्चों ने निजी स्कूलों  को पीछे छोड़ दिया.  सरकारी स्कूलों के 93.19 प्रतिशत बच्चे इस विषय में पास हुए. वहीं प्राइवेट स्कूलों के 91.55 प्रतिशत ही सफल हो पाये. भागलपुर में सरकारी स्कूलों के 0.37 प्रतिशत बच्चों को शून्य अंक आया. इसके मुकाबले निजी स्कूलों में 0.53 प्रतिशत बच्चों को जीरो आये. यहां सरकारी स्कूलों के 83.25 प्रतिशत और निजी स्कूलों के 81.98 प्रतिशत बच्चे फिजिक्स विषय में सफल हुए. 

केमेस्ट्री में पूरे प्रदेश में सरकारी स्कूलों के 0.45 प्रतिशत बच्चों को शून्य अंक आया. वहीं, निजी स्कूलों में आंकड़ा 0.49 प्रतिशत रहा.  तीन प्रमुख जिलोें में भी यही स्थिति पायी गयी है. पटना में निजी स्कूलों के 76 प्रतिशत बच्चे केमेस्ट्री में पास हुए. इसके मुकाबले  सरकारी स्कूलों के 84 प्रतिशत बच्चे केमेस्ट्री में सफल हुए. मुजफरपुर  में 94 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में और निजी स्कूलों  के 93 प्रतिशत बच्चे इस विषय में पास हुए. इसी प्रकार भागलपुर जिले में सरकारी स्कूलों के 86 प्रतिशत और  निजी स्कूलों के 84 प्रतिशत बच्चे केमेस्ट्री में सफल हुए हैं.


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