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Thursday, 8 September 2016

अब आप पार्टी के 21 विधायकों की मेंबरशिप पर खतरा , क्या केजरीवाल अब इसमें भी दोषी "मोदी" को ही ठहरायेंगे ??


नयी  दिल्ली : दिल्ली की अरविंद केजरीवाल नीत आप सरकार को आज तब एक और झटका लगा जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने के उसके आदेश को इस आधार पर दरकिनार कर दिया कि इसे उपराज्यपाल की सहमति के बिना जारी किया गया था.उच्च न्यायालय के इस आदेश से करीब एक महीने पहले ही चार अगस्त को अदालत ने व्यवस्था दी थी कि उपराज्यपाल केंद्र शासित दिल्ली प्रदेश के प्रशासनिक प्रमुख हैं और प्रशासनिक मुद्दों में उनकी सहमति ‘‘अनिवार्य' है.
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल ने 13 मार्च 2015 का आदेश तब दरकिनार कर दिया जब दिल्ली सरकार के वकील ने ‘स्वीकार किया' कि यह उपराज्यपाल की सहमति या विचार लिये बिना जारी किया गया था. दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर नंदराजोग ने उच्च न्यायालय के गत चार अगस्त के फैसले का हवाला दिया और कहा, ‘‘आज मुझे यह स्वीकार करना होगा कि फैसला मेरे (दिल्ली सरकार के) खिलाफ है.' उन्होंने कहा कि 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने वाला 13 मार्च, 2015 का आदेश उपराज्यपाल की सहमति या विचार लिये बिना जारी किया गया था.

दिल्ली सरकार की स्वीकारोक्ति पर गौर करते हुए पीठ ने कहा कि ‘‘जीएनसीटीडी (दिल्ली सरकार) द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि 13 मार्च, 2015 की तिथि वाला आदेश उपराज्यपाल की सहमति या विचार लिये बिना जारी किया गया था। जीएनसीटीडी का आदेश दरकिनार किया जाता है.' उच्च न्यायालय ने चार अगस्त का फैसला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शासन पर उपराज्पाल के प्रशासनिक शक्तियों के बारे में केंद्र और आप सरकार के बीच टकराव को लेकर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवायी करते हुए दिया था.आज की सुनवायी के दौरान अतिरिक्त सालिसिटर जनरल संजय जैन ने पीठ को बताया कि इन विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्ति संबंधी यह मामला चुनाव आयोग के भी संज्ञान में है

संविधान मामलों के एक्सपर्ट के मुताबिक, अब इन 21 संसदीय सचिवों की विधायकी पर खतरा हो सकता है।
 

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