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Saturday, 10 September 2016

रविश कुमार का ब्लॉग के जरिये नितीश कुमार पर वार , पत्रकार रविश कुमार के नए प्रोपगंडा को पत्रकार पुरुषोत्तम सिंह से समझिये ....



­­­­­­­­­­­­­­­NDTV वाले रविश ने ब्लाग लिखा है शहाबुद्दीन के जेल से छूटने पर। ब्लाग की शुरूआत में रविश ने शहाबुद्दीन पर चल रहे आपराधिक मामलों का जिक्र किया है,जो जानकारी रविश ने दी है उसमें सबसे अहम् 37 वैसे मामलों का जिक्र है जिसमें अभियोजन पक्ष के तरफ से गवाही पूरी हो चूकी है लेकिन बचाव पक्ष यानी शहाबुद्दीन को चार साल बाद भी नोटिस नही पहुंचाया जा सका है। मामला बेहद गंभीर है,बिहार में गृहमंत्रालय नीतीश कुमार के हाथों में है और इन चार वर्षोंतक शहाबुद्दीन जेल में बंद थे यानी नोटिस पहुंचाने में लापरवाही जानबूझ कर की गयी। रविश ने इस मसले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को कटघरे में तो खड़ा किया है लेकिन स्वंय को उस कठघरे से बाहर रखा है क्यूं भाई ? एक ऐसा पत्रकार जिसके पास इतनी अहम जानकारी है, जिसका अपना प्राईम टाईम शो है, जो प्रधानमंत्री तक की बखिया उधेड़ता है, जनसरोकारों से जुड़े पत्रकार के तौर पर अपना परिचय देता है,वो खामोश क्यूं रहा ?

और अगर खामोश रहा तो फिर खामोशी वाले कठघरे से बाहर कैसे रह सकता है। रविश इस मामले पर आपकी चुप्पी और अब ब्लाग लिखना "औरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत " जैसा है। बहरहाल ब्लाग के दूसरे हिस्से में रविश ने अनंत सिंह के बहाने गिरिराज सिंह और बीजेपी पर तंज कसते हुए यह प्रयास किया कि इस मुद्दे को भटकाया जाय। रविश ने गिरिराज सिंह के जिस बयान को तर्क या यूं कहें कुतर्क के जरिये परोसने की कोशिश की है उस बयान का सीधा मतलब इतना है कि अगर एक अपराधी को सलाखों के पीछे रखने के लिए सरकार हथकंडे अपना सकती है तो दूसरे को जेल में रोकने के लिए ईमानदार प्रयास क्यूं नही कर सकती....?

रविश ने इतनी सी बात को पहले जाति वाले आंच पर सेंकने की कोशिश की है फिर ध्रुवीकरण वाले चूल्हे पर भून दिया है। आप सोंच रहे होगें की रविश ने ऐसा क्यूं किया हैं, क्यूं एक खास जाति के भावनाओं का जिक्र कर, उसने अनंत सिंह और गिरिराज सिंह के जरिये मूल मुद्दे को भटकाने की कोशिश की है....?। दरअसल शहाबुद्दीन के बेल और जेल से बाहर निकलने के पूरे खेल पर बिहार का न सिर्फ सियासी पारा चढ़ा हुआ है , बल्कि जाति पाती से अलग हटकर लाखों लोगों के मन में बिहार के 1990 वाले अपराधियों के दौर का भय दस्तक दे रहा है। जैसे-जैसे बिहार के आमजनमानस के मन में यह डर घूसेगा , नीतीश कुमार की सुशासन वाली छवि धूलती जायेगी ऐसे में रविश ने प्रोपगंडा एजेंट के तौर पर अपना काम शुरू कर दिया है ताकि खंड-खंड में बंटे बिहारी समाज के लोग शहाबुद्दीन के विरोध को एक खास जाति का विरोध समझें। रविश आप सोशल मीडिया के उन प्लेटफार्मों से भाग गये है जहां दो तरफा संवाद हो सकता था और ब्लाग के जरिये एक तरफा संवाद वाला दौर गुजर गया है, लोग समझने लगे हैं आपके तमाशे को

................................................................................. पत्रकार पुरुषोत्तम सिंह के फेसबुक वाल से .

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