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Monday, 10 October 2016

विडियो : कांग्रेस पार्टी का हाफिज सईद से गहरे और पुराने रिश्ते , हर बार हाफिज सईद की भाषा में क्यों बात करते हैं "दिग्गी राजा" ?

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कम से कम मुझे तो कांग्रेस पार्टी और हाफिज सईद के रिश्ते काफी दिनों से बहुत ही गहरे  दिखाई देते हैं  : रवि रंजन (लखीसराय)

देश में कई आतंकी हमले हुए हों , लेकिन क्या आपने कभी ये किसी पार्टी के लोगों के द्वारा या TV पर सुना है की इस हमले में कौन से धर्म के लोग थे , जो हमले कर रहे थे या करवाए थे ?

शायद नहीं , लेकिन हर बार एक वाक्य जरुर सुने होंगे वो ये की "आतंक और आतंकवादियों का कोई धर्म या मजहब नहीं होता" . हालांकि 98% आतंकी एक विशेष कौम से तालुक रखते हैं .

आतंक का कोई धर्म नहीं होता लेकिन , जब उस आतंकी को हमारे शैनिक मार गिराते हैं , और चर्चा चलती है की जब इस आतंकी का कोई धर्म ही नहीं था , तब इसका अंतिम संस्कार उसके धर्म के अनुसार क्यों की जाय ? क्यों ना उसके लाश को सूअर के गोस्त में लपेट कर कचरे के ढेर में जला दिया जाए ? तब कई मौलाना मांद से निकल कर कहते हैं "नहीं उसका अंतिम संस्कार इस्लाम के अनुसार ही किया जाय" अगर ऐसा नहीं किया गया तो ये अच्छा नहीं होगा , ऐसा क्यों इसका उस मौलाना के पास जवाब नहीं होता  ?




जहाँ तक पार्टी की बात है सभी एक शुर में ये कहते हुए मिल जायेंगे की आतंक का कोई धर्म नहीं होता है , लेकिन जैसे ही मुम्बई में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला होता है और हमारे देश के ऐसी पार्टी जी 60 शालों तक सत्ता पर काबिज रही उस पार्टी के बड़े नेता एवं उनके "आदरणीय दिग्गी राजा" जी का बड़ा बयान आता है की ये हमले हिन्दू आतंकियों द्वारा किये गए हैं , इससे एक पल के लिए स्पष्ट हो गया था की आतंक और आतंवादियों के धर्म होते हैं और वो धर्म है "हिन्दू धर्म" .

मजेदार बात तो ये है की एक आतंकी "अजमल कसाब" पकड़ा गया और सभी आतंकी मार गिराए गए , और सभी आतंकियों के हांथों पर हिन्दू धर्म के अनुशार "कलावा बंधा" पाया गया था .





अब सवाल ये उठता है की आखिर हमले के तुरंत बाद दिग्गी राजा का ये बयान क्यों आया की ये हमले हिन्दू आतंकियों के द्वारा कराया गया था ?

क्या ये हमले आरएसएस पर पाबंदी लगाने और हिन्दू आतंकवाद को सिद्ध करने की ये साजिश थी ? और अगर साजिश थी तो क्या दिग्गी राजा और उसके पार्टी के सम्बन्ध हाफिज सईद से भी है ?

सोचिये अगर कसाब नहीं पकड़ा गया होता तो आज की स्थिति कैसी होती ?

और अगर ऐसा है तो सबसे पहले कार्रवाही इस पार्टी पर और इसके नेताओं पर होनी चाहिए ? अगर ऐसा नहीं होता है तो इसके क्या कारण हैं ?

हद तो तब हो गयी जो उस समय हिन्दू आतंक को सिद्ध करने में लगे पड़े थे , वाही आज सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सवाल उठा रहें हैं ? तो क्या उरी में हुए आतंकी हमले भी इन्ही लोगों के द्वारा आने वाले चुनाव को देखते हुए कराए गए थे ?


और अब जब  100% सफल "सर्जिकल स्ट्राइक" हुआ तब , यही लोग  हाफिज सईद की भाषा क्यों बोलने  लगे ?

देखिये विडियो आखिर हाफिज सईद क्या कहता है ?



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