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Sunday, 9 October 2016

स्कूलों में "सूर्य नमस्कार" उचित नहीं , सुप्रीम कोर्ट को इसे रद्द करना चाहिए


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डॉ सैयद जफर महमूद ने स्कूलों में ‘सूर्य नमस्कार’ को अनिवार्य करार देने संबंधी बंबई नगर निगम (बीएमसी) के आदेश को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है ।

डॉक्टर जफर महमूद ने एक बयान में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी स्कूल में विशेष धर्म के धार्मिक आस्था का प्रतीक ‘सूर्य नमस्कार’ को अनिवार्य करार देना संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत दिए गए नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सभी नागरिकों को पूर्ण स्वतंत्रता से अपने धर्म का पालन करने का अधिकार हासिल है इसलिए बीएमसी का आदेश संविधान का सीधा सीधा उल्लंघन है.

स्वतंत्रता से अपने धर्म का पालन करने का अधिकार हासिल है इसलिए बीएमसी का आदेश संविधान का सीधा सीधा उल्लंघन है
उन्होंने कहा कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों हनन के मामल में नागरिकों के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप कर सकता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व अधिकारी और मुसलमानों के सामाजिक हालात पर रिपोर्ट तैयार करने वाली सच्चर समिति के सलाहकार डॉ जफर महमूद ने कहा कि दुर्भाग्य से बंबई हाई कोर्ट ने बीएमसी आदेश पर आदेश अवरोध जारी करने से इनकार कर दिया है।

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 में नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता दी गई है, जबकि अनुच्छेद 28 (1) में सरकारी वित्त पोषित किसी भी संस्था में किसी विशेष धर्म शिक्षण व हिदायत निषेध किया गया है।


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