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Tuesday, 11 October 2016

जब बुर्खा पहन कर आने में किसी को कोई तकलीफ नहीं तो भगवा स्कार्फ मात्र से परेशानी क्यों ? कहाँ हो रहा है शिक्षण परिसर का उपयोग मजहब के हिसाब से अपनी ताकत दिखाने के लिए

The use of premises by teaching religion to show their strength.
बंगलुरू/हुबाली। हावेरी जिले के कई डिग्री कॉलेजों में हिंदू और मुस्लिम छात्रों के बीच बुर्का पहने को लेकर संघर्ष उभर आया है। इससे शैक्षिक संस्थाओं के प्रबंधन और व्याख्याताओं में आतंक का माहौल बन गया है।

हालांकि, बुर्का पहनने को लेकर पहले यह विवाद दक्षिण कन्नड़ तक सीमित था, लेकिन अब जिले के कई हिस्सों में फैल गया है। नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार दोनों समुदायों के छात्र कॉलेज परिसर का उपयोग अपनी ताकत दिखाने के लिए करने लगे हैं। मुस्लिम छात्राएं जहां बुर्का पहनकर कॉलेज आ रही हैं, वहीं हिंदू छात्र और छात्राएं भगवा स्कार्फ पहनकर आ रहे हैं।

हंगल के श्री कुमारेश्वर आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज में छात्रों के लिए यूनिफॉर्म को अनिवार्य कर दिया गया था। कॉलेज के अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्होंने छात्रों के बीच एकता और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए यह नियम बनाया है। प्रारंभ में सभी समुदायों के छात्रों ने इस सिस्टम का पालन किया।

साल बीतने के साथ ही कई मुस्लिम छात्राएं बुर्का पहनकर आने लगीं। व्याख्याताओं द्वारा उन्हें रोकने के लिए किए गए प्रयास कोई सकारात्मक परिणाम नहीं ला सके। मुस्लिम छात्रों की इस प्रतिक्रिया ने हिंदू छात्रों ने भगवा स्कार्फ पहनकर कक्षाओं में आने के लिए प्रेरित किया।

कॉलेज प्राचार्य एसवी सोमनाथ ने कहा कि बुर्का पहनने को लेकर संघर्ष केवल हंगल के सरकारी डिग्री कॉलेज तक ही सीमित था। मगर, अब यह जिले में कई कॉलेजों में फैल गया है। उन्होंने कहा कि मैंने यूनिफॉर्म को लेकर सरकार को पत्र लिखा है और इस संघर्ष को खत्म कराने के लिए उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप की मांग की है।

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