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Sunday, 16 October 2016

'एक साथ तीन बार तलाक बोलने' के चलन को समाप्त करना चाहिए , सभी समुदायों के पर्सनल लॉ संविधान के तहत आने चाहिए : जेटली

Telling a divorce three times' should end the practice of, the Constitution should be under personal laws of all communities Jaitley
नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार का विचार स्पष्ट है कि पर्सनल लॉ संविधान के दायरे में हों तथा लैंगिक समानता एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार के नियमों के अनुरूप होना चाहिए। हाल ही में एक साथ तीन बार तलाक बोलने को लेकर विवाद चल रहा है।

'तीन तलाक और सरकार का हलफनामा' शीषर्क से फेसबुक पर लिखे पोस्ट में जेटली ने कहा कि अतीत में सरकारें ठोस रुख अपनाने से बचती रही हैं पर वर्तमान सरकार का इस पर स्पष्ट रुख है कि पर्सनल लॉ को मूल अधिकारों के अनुरूप होना चाहिए।

गौरतलब है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दो सितंबर को उच्चतम न्यायालय से कहा था कि सामाजिक सुधार के नाम पर समुदायों के पर्सनल लॉ को फिर से नहीं लिखा जा सकता और उसने तलाक के मामले में मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाली कथित असमानता के मुद्दे पर दायर याचिकाओं का विरोध किया।
उन्होंने लिखा है, "पर्सनल लॉ को संविधान के दायरे में होना चाहिए और ऐसे में 'एक साथ तीन बार तलाक बोलने' को समानता तथा सम्मान के साथ जीने के अधिकार के मानदंडों पर कसा जाना चाहिए। यह कहने की जरूरत नहीं है कि यही मानदंड अन्य सभी पर्सनल लॉ पर भी लागू है।"

जेटली ने लिखा है, वर्तमान में उच्चतम न्यायालय के समक्ष जो मामला है वह सिर्फ 'एक साथ तीन बार तलाक बोलने' की संवैधानिक वैधता के संबंध में है।

कानून मंत्रालय ने सात अक्तूबर को उच्चतम न्यायालय में दायर अपने हलफनामे में कहा था कि बहु-विवाह और 'एक साथ तीन बार तलाक बोलने' के चलन को समाप्त करना चाहिए।

जेटली ने लिखा है, "समान नागरिक संहिता को लेकर अकादमिक बहस विधि आयोग के समक्ष जारी रह सकती है। सभी समुदायों के अपने पर्सनल लॉ हैं, पर क्या ये पर्सनल लॉ संविधान के तहत नहीं आने चाहिए?"
अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि महिलाओं को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। प्रत्येक नागरिक के जीवन को प्रभावित करने वाले पर्सनल लॉ क्या समानता के इन संवैधानिक मूल्यों और सम्मान के साथ जीने के अधिकार के अनुरूप नहीं होने चाहिए?"

जेटली ने एक के बाद एक कई सवाल उठाकर सरकार के कदम को सही बताने की कोशिश की है। वहीं तीन तलाक को उन्होंने अनुचित बताने की भरपूर प्रसाय किया है।

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