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Sunday, 6 November 2016

NDTV के एक दिन के बैन से ही असहिष्णु हो गए रविश कुमार और अरब , पाक फंडेड तमाम सेखुलर दोगले. ऐसा क्यों भाई-जान आप तो अतिसहिष्णुता वाले लोग थे या अतिसहिष्णुता का एक्ट था ?

NDTV Expose : एक दिनके बैन से ही असहिष्णु हो गए पाक परस्त गैंग के दोगले .
क्या चैनल की सिर्फ बोलने , सवाल पूछने की जिम्मेदारी होती है ? मेरे समझ से अगर आप (रविश & बुर्खा गैंग) ऐसा समझतें हैं तो प्लीज ये "जाहिल सोच" अपने तक ही सिमित रखें ज्यादा अच्छा रहेगा . अपनी सोच को देश की आवाज बना कर अपने चैनल पर विधवा विलाप ना करें . और हाँ आपके शुर-शुर में शुर मिलाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी , रखैल पत्रकार , चीनी बामपंथी , अरब , पाक फंडेड फिल्मकार तक ही देश सिमित नहीं है .

अतिबुद्धिजिवी श्री श्री रविश कुमार जी आपने कभी सोचा है , की दुसरे को रास्ते दिखाने के बजाए खुद के अन्दर झाँक कर भी कभी देख लेना चाहिए . अगर नहीं तो देखिये ,

और सोचिये की आपमें क्या गलतियाँ थी की मजबूरन आपको फेसबुक छोर कर भागना पड़ा ? जिसका रोना आज आप रो रहे हो , जिस बोलने की स्वतंत्रता की दुहाई देते फिर रहे हों वो दुहाई तब कहाँ थी जब लोग आपसे फेसबुक के जरिये कटु प्रश्नों के जरिये सम्वाद करने की कोशिश करते थे ? और आप चाटुकारिता में इतने मस्त रहते थे की जनता के सवाल के जवाब देने के बजाए बीजेपी और मोदी भक्त का सर्टिफिकेट देने में लग जातें थे वो भी लाइव टीवी पर , मैं सवाल पूछना चाहता हूँ ऐसा क्यों ? क्या जनता को ये अधिकार नहीं है की आप जैसे चाटुकारों से सवाल कर सके ? तब तो आपको उनकी अभिव्यक्ति की आजादी याद नहीं आती है ?

या सिर्फ अभिव्यक्ति की आजादी आप जैसे चाटुकारों , अरब , पाक फंडेड फिल्मकारों , कांग्रेस्सियों , बामपंथियों के लिए ही है ? हम आम पब्लिक के लिये नहीं ?
देश को गुमराह करना बंद करिए और जनता को ये बताना शुरू करिए की आखिर आपके  "र-NDTV" को बैन क्यों किया गया ? 

"र
-NDTV" को मोदी या सरकार के आलोचना के लिए बैन नहीं किया गया , बल्कि देश की संवेदनशील सैन्य सूचना लीक करने के लिए बैन किया गया है .  लेकिन देश के कई गद्दारों के द्वारा बार-बार ये आरोप लगाया जा रहा है की मोदी सरकार आपातकाल की और बढ़ रही है . तानाशाह के जैसा व्यवहार कर रहें हैं मोदी वगैरह वगैरह जो पूरी तरह से बेबुनियाद आरोप है .

आम जनता में
"र-NDTV" के प्रति काफी रोष है , की कोई टीवी चैनल आतंकी हमलों के दौरान गैर जिम्मेदारी से कवरेज और संवेदनशील मुद्दों को जगजाहिर कैसे कर सकता है ? जिससे पाकिस्तान को बार-बार मदद मिलती हो ? और ये महज संयोग की बात नहीं है , क्योकि बार-बार ऐसी गलतीयां नहीं हो सकती , गलतियाँ सिर्फ एक बार होती है और जब ऐसी गलतियां बार-बार होती है , तब ये गलतीयां किसी शाजिश की ओर इशारे करते हैं , कई बार जैसे :  कारगिल युद्ध के दौरान , 26/11 मुंबई हमले के दौरान और अब पठानकोट हमले के दौरान भी ऐसी देशद्रोही हरकतें कर चूका है ?
 इसलिए जहां सोशल मीडिया पर आम लोग सरकार के निर्णय का समर्थन कर रहे हैं, वहीं केवल लेफ्ट लिबरल, कांग्रेसी व कुछ
तथाकथित बुद्धिजीवी , चीनी बामपंथी , अरब , पाक फंडेड फिल्मकार , रखैल पत्रकार , जो  पत्रकारिता की आड़ में पॉवर ब्रोकिंग कर रहे पत्रकार ही "र-NDTV" के समर्थन में खड़े हैं. आप सोशल मीडिया को गौर से वाच कीजिए , फर्क पता चल जाएगा.

और हाँ याद आया आप तो सभी "अतिसहिष्णुता" पर विश्वास रखने वाले लोग थे ? तो अब क्या हो गया ? या उस समय अतिसहिष्णुता का एक्टिंग कम्पटीशन चल था पुरे 3 महीने तक ? अगर एक्ट
कम्पटीशन था तो आप तमाम लोगों के एक्टिंग के लिए तालियाँ तो बनती है . बहुत शुन्दर एक्टिंग किये हो ? और अभी इस एक्टिंग कम्पटीशन के विजेता घोषित नहीं किये गए हैं , तब देश की जनता एक शुर में आपको इस अवार्ड को आपके नाम करती है रविश चाहुकार .


....................................................................................................................... रवि रंजन भारद्वाज

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