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Thursday, 3 November 2016

"खिसियाल बिलैया खम्भा नोचे" जैसी स्थिति में पाकिस्तान , अब इंडियन एम्बेसी के 8 कर्मियों को पाकिस्तान ने बताया RAW का जासूस

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भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायोग के आठ कर्मियों को भारतीय खुफिया एजेंसियों का सदस्य बताया तथा उनपर विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग में एक बयान पढ़ा एवं कहा, कई भारतीय राजनयिक और कर्मचारी राजनयिक कामकाज की आड़ में पाकिस्तान में आतंकवादी एवं विध्वसंक गतिविधियों में शामिल हैं।

उन्होंने कहा, उनके नाम और पद हैं (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के सदस्य -रॉ के स्टेशन प्रमुख अनुराग सिंह, प्रथम सचिव वाणिज्यिक) वाणिज्यिक दूत राजेश कुमार अग्निहोत्री, अमरदीप सिंह भटटी, अताशे वीजा (धमेंद्र सोढ़ी, स्टाफ) विजय कुमार वर्मा, कर्मचारी और माधवन नंद कुमार कर्मचारी हैं। जकारिया ने कहा, भारतीय खुफिया ब्यूरो के सदस्य प्रेस और संस्कति के प्रथम सचिव और आईबी स्टेशन प्रमुख बलबीर सिंह, सहायक कर्मी कल्याण अधिकारी जयबालन सेंथिल हैं।

जकारिया ने दावा कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान द्वारा अवांछित घोषित किए गए सुरजीत सिंह भी आईबी के कथित सदस्य थे। वह फर्जी पहचानपत्र का इस्तेमाल कर खुद को दूरसंचार कंपनी वारिद का कर्मचारी बता रहे थे। पाकिस्तान ने सुरजीत को अवांछित व्यक्ति घोषित किया था। इससे पहले, भारतीय पुलिस ने आईएसआई के एक जासूसी कांड का पर्दाफाश किया, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी महमूद अख्तर पर ऐसी ही कार्रवाई की थी।

प्रवक्ता ने आरोप लगाया, हम इस बात से बहुत निराश हैं कि भारत आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और आतंक वित्तपोषण में न केवल संलिप्त पाया गया है, जिसका कुलभूषण जाधव ने खुलासा किया और 15 अगस्त को एवं उससे पहले (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की) ढाका यात्रा के दौरान शीर्षतम राजनीतिक स्तर पर दिए गए वक्तव्यों से भी पुष्टि हुई, बल्कि भारत अपने कथित नापाक मंसूबों के लिए अपने राजनयिक मिशनों का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि उच्चायोग के अधिकारी बलूचिस्तान और सिंध विशेषकर कराची में जासूसी, विध्वंस और आतंकवादी गतिविधियों को शह देने में, चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारों की राह में साजिश रचने और इन दोनों प्रांतों में अस्थिरता को बढ़ावा देने में लगे हैं।

जकारिया ने आरोप लगाया कि ये अधिकारी विभिन्न गतिविधियों से पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इन अधिकारियों ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के कुछ गुटों का संचालन किया, धार्मिक अल्पसंख्यकों को उकसाया, संप्रदायवाद को बढ़ावा दिया तथा मानवाधिकार के मुददों पर दुष्प्रचार से पाकिस्तान को बदनाम किया। उन्होंने भारत पर दो संप्रभु देशों के बीच संबंध बनाए रखने से संबंधित राजनयिक नियमों एवं आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मालूम था कि अख्तर उच्चायोग अधिकारी हैं, लेकिन उन्होंने वियना संधि का उल्लंघन किया।

जकारिया ने आरोप लगाया कि भारत ने छह अन्य पाकिस्तानी राजनयिकों पर क्षूठे आरोप लगाकर उनके नाम जारी किए जिससे उनके और उनके परिवारों की जान खतरे में पड़ गई। उन्होंने दावा किया, फलस्वरूप, हमें उनकी सुरक्षा की खातिर उन्हें वापस बुलाना पड़ा। उनकी ये बेहद अफसोसनाक हरकतें कश्मीर में उत्पीड़न से विश्व का ध्यान हटाने की उनकी हताश कोशिश का हिस्सा हैं

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