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Wednesday, 1 March 2017

शाजिया इल्मी को जामिया यूनिवर्सिटी में "तिन तलाक" पर बोलने से रोका गया , अब कहाँ गयी अभिव्यक्ति की आजादी ?




डीयू के रामजस कॉलेज में जेएनयू के छात्र उमर खालिद को लेक्चर देने से रोके जाने के बाद विवाद पैदा हो गया है. ऐसा ही मामला देश की प्रतिष्ठित जामिया यूनिवर्सिटी में भी आया है जहां पर बीजेपी नेता शाजिया इल्मी ने उन्हें बोलने से रोके जाने का आरोप लगाया है.

बीजेपी नेता शाजिया इल्मी का आरोप है कि उन्हें जामिया यूनिवर्सिटी में ट्रिपल तलाक पर एक लेक्चर देने जाना था लेकिन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की ओर से कहा गया कि शाजिया के वहां आने से माहौल खराब हो जाएगा. कार्यक्रम के आयोजक मुझे बुलाना चाहते थे लेकिन दबाव की वजह से मुझे नहीं बुलाया गया. उन्होंने कहा कि उमर खालिद, शहला को देश के टुकड़े करने की आजादी है लेकिन शाजिया इल्मी ने कांग्रेस का भ्रष्टाचार उजागर किया और बीजेपी का साथ दिया इसलिए उन्हें बोलने की आजादी नहीं दी गई.

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आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुईं शाजिया इल्मी ने कहा कि एबीवीपी पर हिंसा और मारपीट का आरोप लगाया जा रहा है लेकिन हालात बिल्कुल इससे उलट हैं. उन्होंने कहा कि मैं जामिया की पूर्व छात्रा हूं और मेरा ट्रेक रिकॉर्ड बहुंत अच्छा हैं, ऐसे में मेरे जामिया जाने से किसे और क्यों दिक्कत हो रही है.

शाजिया का आरोप है कि वो बीजेपी की नेता हैं इसी वजह से उन्हें जामिया में बोलने से रोका गया. उन्होंने कहा कि जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी के बात करते हैं अब वो मेरी अभिव्यक्ति के छीने जाने पर चुप क्यों हैं.


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