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Monday, 2 October 2017

दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ महाअभियान : जब नीतीश ने कहा, ये बेटियां 'बेचारी' नहीं, इनको सलाम

बाल विवाह और दहेज मुक्त समाज बनाने को एक साथ उठे हजारों हाथ 


पटना : शराबबंदी को सफलतापूर्वक लागू कर देश में उदाहरण पेश करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ हाथ उठाया तो पूरा प्रदेश खड़ा हो गया. कदम से कदम मिलाकर इस महाअभियान में लोगों ने साथ देना का वादा किया. इसका गवाह न सिर्फ पटना का सम्राट अशोक कन्वेंशन हॉल बना, बल्कि हर जिला मुख्यालयों से भी हजारों लोगों ने संकल्प लेकर अभियान को सफल बनाने का वादा किया.  सोमवार को जब पूरा देश गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मना रहा था, उस समय पटना में एक और महाअभियान का आगाज हो रहा था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित प्रमुख मंत्रियों, विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों, विभिन्न स्थानों से यहां पहुंचे आम जन के बीच समाज के लिए नासूर बन गये दहेज प्रथा और बाल विवाह के खात्मे की शपथ ली गयी. दोपहर करीब डेढ़ बजे सम्राट अशोक कन्वेंशन हॉल में मुख्यमंत्री स्वयं संकल्प लेने खड़े हुए तो खचाखच भरे हॉल में अनगिनत हाथ खड़े हो गये.



 






 नीले और सफेद गुब्बारों से सजे हॉल के बीच सफेद टोपी पहनकर पांच हजार महिलाओं व पुरुषों ने एक स्वर में दहेज प्रथा और बाल विवाह को जड़ से मिटाने की शपथ ली. शपथ लेने वालों में विधानसभा के स्पीकर विजय कुमार चौधरी, बिहार विधान परिषद के उप सभापति हारुण रशीद, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, समाज कल्याण मंत्री कुमारी मंजू वर्मा, नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा, शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद, विकास आयुक्त शिशिर कुमार सिन्हा, परिवहन विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मल्होत्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन, महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक डॉ एन विजयलक्ष्मी, समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव सुनील कुमार आदि शामिल थे.




नीतीश ने यह भी आह्वान किया कि ऐसी किसी भी शादी में शामिल होने से परहेज करें, जो बाल विवाह हो या दहेज लेकर हो रही हो. महिला बाल विकास, शिक्षा, नगर विकास, पंचायती राज सहित कई विभागों की साझेदारी में इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया गया. जिला मुख्यालयों को लाइव वेबकास्टिंग से जोड़ा गया था. सीएम ने संदेश दिया कि इस नये अभियान से यह कतई न समझा जाये कि नशामुक्ति अभियान में कोई ढील दी गयी है.
ये बेटियां 'बेचारी' नहीं, इनको सलाम
ये बेहद साधारण परिवार की बेटियां हैं. ये बेटियां अब बेचारी नहीं रहीं. इन्हें दया भरी भाव से देखने की गलती मत करियेगा. इन बेटियों ने वो काम कर 
दिखाया है, जो हमारा समाज सालों में नहीं कर पाया. इन बेटियों ने समाज की उन कुरीतियों के खिलाफ डंडा उठाया है, जिसके आगे पूरा समाज नतमस्तक है. जी हां, हम बात कर रहे हैं रिंकी (विदुपुर, वैशाली), काजल (गया) और धनवंती (हिरबरा, दानापुर) की. अपने जज्बे और बहादुरी के बूते ये तीनों लड़कियां आज समाज के लिए रोल मॉडल बन गयी हैं. महिला विकास निगम ने इन तीनों को दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ 'रोल मॉडल' के रूप में प्रस्तुत किया. 
आइए, इन्हीं तीनों लड़कियों की जुबानी जानते हैं इनकी कहानी...
दहेज लेने वाले लड़के से मत करिए शादी
मेरे पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. मेरी उम्र 18 वर्ष है. इसी साल आठ मई को मेरी शादी थी. जयमाला हो चुका था. तभी दूल्हा अपने लिए सोने की चेन और उसके पिता 51 हजार रुपये नकद मांगने लगे. 
शादी तय होते ही बाइक दी जा चुकी थी. फिर भी लड़के वालों का मन नहीं भरा था. शादी के मंडप में मैं चुपचाप बैठी थी और दहेज की मांग उठ रही थी. पिता सबके आगे गिड़गिड़ा रहे थे. काफी देर तक मैं सबकुछ देखती रही, फिर सहन नहीं हुआ. मैं शादी के मंडप से उठ खड़ी हुई. मैंने माला फेंका और उस लालची और दहेज लोभी लड़के से शादी करने से इन्कार कर दिया. मेरे मां-बाप को समाज के कुछ लोगों ने ऐसा करने से रोका. पर, उन्होंने मेरा साथ दिया. शिक्षा संगठन के लोगों को इस बात की जानकारी हुई. वो लोग मेरे घर आये.
मुझे प्रोत्साहित किया. बात जिलाधिकारी तक पहुंची. उन्होंने मेरी बहुत मदद की. लड़के वालों से पैसे और सामान वापस दिलाया. लैपटॉप सरकार की ओर से मिला. कौशल विकास योजना के तहत मैं कंप्यूटर का प्रशिक्षण ले रही हूं. 15 अगस्त को मुख्यमंत्री ने मुझे सम्मानित किया. मेरे एक कठोर फैसले से लालची और दहेजलोभियों को मुंहतोड़ जवाब मिला है. अब मैं ऐसे लड़के से शादी करूंगी, जो दहेज की चाहत न रखता हो.
-धनवंती कुमारी, हिरबरा, दानापुर
न बाल विवाह करेंगे, न करने देंगे
मैं चार भाई-बहन हूं. तब मैं 15 साल की थी. मेरी मम्मी व पापा ने शादी तय कर दी. मम्मी से मैंने बात की. ऐतराज जताया. पर, मम्मी नहीं मानीं. मम्मी ने कहा- आगे पढ़ाने के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं. चुप होकर शादी कर लो. तभी कामिनी दीदी गांव में बैठक कराने आयीं.
मैंने अपनी पूरी बात उन्हें बतायी. उन्होंने मेरे घरवालों को समझाने की कोशिश की. पर कोई मानने को तैयार नहीं था. तब कामिनी दीदी ने मेरी मम्मी और पापा को कानूनी कार्रवाई के बारे में बताया. दो साल तक का सश्रम कारावास होने की जानकारी दी. तब जाकर मेरी शादी रुकी. आज मैं 12वीं में पढ़ रही हूं. कंप्यूटर कोर्स भी करती हूं. आइये, निश्चय करें- न बाल विवाह करेंगे, न करने देंगे.   
-रिंकी कुमारी, विदुपुर, वैशाली
बेटी को बोझ न समझें
मेरी शादी 14 वर्ष में ही तय कर दी गयी थी. मां से मैंने बोला तो उन्होंने दो टूक कहा- छोटी हो अभी, दहेज कम लगेगा. बड़ी हो जाओगी तो दहेज ज्यादा लगेगा. कहां से आयेगा इतना दहेज.
उस समय सरकार की ओर से बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ गांव-गांव नुक्कड़ नाटक कराया जा रहा था. मैंने भी वह नाटक देखा था. मां को भी दिखाया. फिर भी नहीं मानीं. इस बात की जानकारी महिला विकास निगम के एक सर को लगी. वह मेरे घर आये.
उन्होंने मेरी मां को समझाया. तब जाकर सभी माने और मेरा बाल विवाह होने से बच गया. अब मैंने ठान ली है कि न बाल विवाह करूंगी, न ही करने दूंगी. बेटी को कभी बोझ नहीं समझना चाहिए. बेटियों को भी मौका दिया जाये तो वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकती हैं. -काजल कुमारी, अरैया, गया

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