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Saturday, 7 October 2017

अब मौलाना बतायेंगे महिलाओं को कहाँ-कहाँ के बाल कहाँ और कैसे रिमूव करें और कराएं , जानिये कठमुल्लों की नयी थ्योरी ........







नई दिल्ली (8 अक्टूबर):  जी हाँ जैसा की आपने शीर्षक पढ़ा , इस्लाम में हराम और काफिर का सम्बन्ध काफी घनिष्ठ है इतना घनिष्ठ की इस्लाम में जैसा सम्बन्ध बीबी और शोहर का होता है .


जब शोहर को बीबी से मन भर जाए तो किसी भी बहाने पत्नी को तालाक देकर नयी बीवी को ले आओ चाहे उस शोहर की उम्र 60 वर्ष का ही क्यों ना हों . और उसमें भी उसके फेवर में बिना कुछ जाने , समझें कई कठमुल्ले सामने आ जातें हों .

ठीक इसी तरह से अगर इन कठमुल्लों की बातों को या धर्म को कोई अन्य धर्म के लोग ना मानें तो उसे काफिर समझ कर उसकी ह्त्या तक करना इनके मुताविक जायज होता है . तो कल भी कुछ इसी तरह की घटना घटी इन कठमुल्लों नें महिलाओं के लिए क्या-क्या नए फरमान सुनाएँ गएँ है जानतें हैं


दारूल उलूम देवबंद ने मुस्लिम महिलाओं को लेकर जारी फतवे पर कायम रहते दोहराया है कि फैशन परस्ती के लिए बाल कटवाना और आंखों की भौंहों को बनवाना इस्लाम में जायज नहीं है। फतवे पर मुस्लिम उलेमाओं का कहना है कि आज के आधुनिक दौर में महिलायें सजने संवरने के लिए ब्यूटी पार्लर में जाती हैं। उससे बेपर्दे होती है जो ठीक नहीं है। मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि अगर आइब्रो के बाल बढ़ जाते हैं तो उन्हें ठीक तो किया जा सकता है लेकिन ब्यूटी पार्लर में जाकर आइब्रो बनवाना ठीक नहीं है।





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