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Sunday, 1 October 2017

गांधी जयंती पर दहेज और बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई शुरू करेंगे नीतीश कुमार




पटनाः महात्मा गांधी जयंती के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक नए अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं।उन्होंने दहेज-प्रथा, बाल-विवाह तथा अन्य सामाजिक बुराइयों से लड़ने का ऐलान किया है। इसके पीछे उनका मानना है कि सूबे के विकास में सामाजिक पिछड़ापन बाधक है।











नीतीश कुमार अपने दल के लोगों को कह चुके हैं कि जिस शादी के बारे में शक हो कि उसमे दहेज का लेन-देन हुआ है उसमें शिरकत ना करें। बाल-विवाह के खिलाफ भी वे जंग छेड़ने वाले हैं। सूबे में बाल-विवाह की कुप्रथा खत्म नहीं हो पाई है। हाल की एक रिपोर्ट में आया है कि सूबे में होने वाली कुल शादियों में 39 फीसदी बाल-विवाह की श्रेणी में आते हैं और यह राष्ट्रीय औसत से बहुत ज्यादा है।












मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार ने हर जाति और समुदाय की महिला आबादी को अपने पक्ष में लामबंद करने में कामयाबी हासिल की है।इससे पहले उन्होंने स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को साइकिल और स्कूल की पोशाक देने की योजना चलायी थी। यह योजना बड़ी कामयाब रही और स्कूलों में नामांकन की संख्या में खूब इजाफा हुआ।


नीतीश के करीबी सहयोगी और पार्टी के महासचिव संजय झा कहते हैं कि 'शराबबंदी के कानून की तरह हमलोग दहेज और बाल-विवाह को रोकने वाले कानून को भी सख्त बना सकते हैं जो कि इन सामाजिक बुराइयों को रोकने का साधन साबित हो सकता है। सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है जिसमें दहेज के लेन-देन में शामिल सरकारी अधिकारियों को पद से हटाना तथा बाल-विवाह पर रोक के कानून का पालन ना करने वालों की जेल की अवधि बढ़ाना शामिल है।'

खर्चीले विवाह समारोह में शामिल होने या बाल-विवाह में भागीदार बनने वाले पार्टी के नेताओं को दंडित किया जा सकता है और उन्हें पार्टी से बाहर का भी रास्ता दिखाया जा सकता है। संजय झा की बातों का एक संकेत यह भी था।


मुख्यमंत्री के कदमों की प्रशंसा करते हुए संजय झा ने कहा, 'सामाजिक बुराइयों को मिटाने के लिए कई सुधारकों ने अथक मेहनत की लेकिन तमिलनाडु के प्रथम मुख्यमंत्री अन्नादुरै को छोड़कर किसी और मुख्यमंत्री ने तकरीबन आधी आबादी की राह रोकने वाली सामाजिक प्रथाओं के खिलाफ लड़ाई ठानने की नहीं सोची। नीतीश जी ने दोतरफा रणनीति तैयार की है-जनता के कल्याण की योजनाओं को गति दी जा रही है और आगे बढ़कर सामाजिक जागरुकता फैलाने का काम हो रहा है।'

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