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Sunday, 12 November 2017

बांग्लादेश में जलाये गए हिंदुओं के घर , रोहिंग्या के समर्थन करने बालों का इस घटना पर मौनव्रत ?


बांग्लादेश में जलाए गए हिन्दुओं के घर रोहिंग्याओं के पक्ष में खड़ा होने वाले खामोश क्यों :अवधेश कुमार
बांग्लादेश के रंगपुर जिले की ठाकुरपाड़ा गांव में मुस्लिम 

कट्टरपंथियों ने हिन्दू बस्तियों पर हमला कर दिया। लूटपाट की, महिलाओं के साथ अभद्रता की, मारा पीटा और घरों को आग के हवाले कर दिया। यह घटना संयोग से अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आ गया है, अन्यथा वहां के अल्पसंख्यक हिन्दुओं के साथ अत्याचार की घटनाएं प्रकाश में नहीं आतीं।

कहा जा रहा है कि ठाकुरपाड़ा के किसी हिन्दू ने फेसबुक पर ऐसा कुछ लिखा था जो कट्टरपंथियों को नागवार गुजरा। पता नही ंसच क्या है। लेकिन इस अफवाह के आधार पर उन्हांेंने उसके खिलाफ वातावरण बनाया, लोगों को एकत्रित किया और हजारों की संख्या में पहुंच गए गांव। कुछ समय के लिए न वहां कोई सरकार का अस्तित्व था न कानून व्यवस्था का। पुलिस आई भी तो उसकी संख्या इतनी कम थी कि इनको नियंत्रित करना कठिन था।

उन हिन्दुओं की वर्षोंं की जमा पूंजी और घर सब स्वाहा हो गया। इज्जत गई सो अलग। इसका क्या जवाब है? हालांकि अब वहां पूरी पुलिस बल को तैनात किया गया है। सरकार ने एक समिति भी बना दी है जो मामले की जांच कर रिपोर्ट देगी। पर इससे होगा क्या? आप किसी बड़े समूह को कैसे सजा दे सकते हैं। बांग्लादेश में इस तरह हिन्दुओं पर हमले की घटनाएं आए दिन होती रहती है। वहां मंदिर तोड़े जाते हैं, कुछ पर कार्रवाई होती है और फिर आगे ऐसी घटना घटती है।

हालांकि बांग्लादेश की सरकार भारत के साथ मित्रता रखती है जो वास्तविक है। किंतु इस मामले में वह ज्यादा कुछ नहीं कर पाई है। तो भारत को ऐसे मामले में क्या करना चाहिए? कम से कम बांग्लादेश सरकार से बातचीत की जा सकती है तथा हिन्दुओं के पुनर्वासन के लिए हर संभव मदद भेजा जा सकता है। 

किंतु जो लोग रोहिंग्याओं को लेकर छाती पीटते और सरकार को कोसते हैं वे कहां हैं? उनमें से किसी की आवाज इस घटना पर सामने नहीं आ रही है। तो क्यों? क्या हिन्दुओं पर हुआ अन्याय अन्याय नहीं है? क्या यहां मानवाधिकार नहीं है। इनकी आवाज उस समय भी नहीं उठी जब पता चला कि रोहिंग्याओं ने अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमला करके एक साथ 100 के आसपास हिन्दुओं को मारकर जमीन में गाड़ दिया। तो ऐसे पाखंडी मानवाधिकारवादियों को क्या कहा जाए ?

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