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Monday, 1 January 2018

तीन तलाक विधेयक : राज्यसभा में सरकार आज करेगी पेश , फंस सकता है पेच






मुस्लिम समाज में प्रचलित एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के खिलाफ मुस्लिम महिला (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक को आसानी से लोकसभा में पारित कर लिया गया, लेकिन राज्यसभा में सरकार की राह आसान नहीं है। राजनीतिक दल इसका विरोध भले ही नहीं कर रहे हों, लेकिन ज्यादातर दलों की राय है कि इस विधेयक को स्थाई समिति को भेजकर और बेहतर बनाया जाए। राज्यसभा में मजबूत विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हो सकता है।

विधेयक राज्यसभा में मंगलवार को पेश होने के लिए सूचीबद्ध है। सरकार की योजना है कि मंगलवार को ही इस पर चर्चा कराकर पारित करा लिया जाए। लेकिन 28 दिसंबर को लोकसभा में जब विधेयक पर चर्चा हुई थी तो कांग्रेस, माकपा, अन्नाद्रमुक, द्रमुक, बीजद, राजद, सपा समेत कई दलों ने इसे संसदीय समिति को भेजने की मांग जोरदार तरीके से उठाई थी। राज्यसभा में भी इन दलों का रुख यही रहने की संभावना है। कई छोटे दल भी चाहते हैं कि संसदीय समिति में इस विधेयक को भेजा जाए।

तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा में विधेयक पर तटस्थ रुख अपनाया था। लेकिन वह भी विधेयक को इस स्वरूप में पारित किए जाने के पक्ष में नहीं है। राज्यसभा में उसके 12 सांसद हैं। यदि राज्यसभा में सदन की राय बनती है कि विधेयक को संसदीय समिति या सलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए तो तृणमूल कांग्रेस भी इसका समर्थन करेगी। बीजद, एनसीपी समेत अन्य विपक्षी दल भी इस मामले में कांग्रेस का समर्थन कर सकते हैं। लेकिन काफी कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि विपक्ष कितनी एकजुटता दिखाता है। यदि संख्या बल के बावजूद विपक्षी एकजुटता सदन में नजर नहीं आती है तो फिर सरकार विधेयक को विपक्ष के हंगामे के बीच भी पारित करा सकती है।





कानून एवं न्याय मंत्रालय से संबद्ध स्थाई समिति राज्यसभा की है। इसलिए यदि सदन का बहुमत इसे समिति को भेजने के पक्ष में रहता है तो सरकार के पास दो विकल्प होंगे। एक स्थाई समिति को भेजा जाए। दूसरे, सलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। इनमें से कोई भी एक विकल्प विपक्ष को भी स्वीकार हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तीन तलाक पर प्रतिबंध लग चुका है। इसलिए विधेयक को इसी सत्र में पारित करने की जल्दबाजी का कोई ठोस आधार सरकार के पास नहीं बनता है। क्योंकि अभी कोई तीन तलाक देता है तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सकती है।

राज्यसभा में दलीय स्थिति
कांग्रेस ----57
भाजपा----57
सपा------18
अन्नाद्रमुक--13
तृणमूल----12
बीजद-----8
वामदल-----8
तेदेपा----6
राकांपा----5
द्रमुक----4
बसपा----4
राजद----3
-कांग्रेस एवं भाजपा दोनों का संख्याबल बराबर है। लेकिन कांग्रेस को अन्य छोटे दलों का समर्थन मिल सकता है जिनकी संख्या करीब 72 है।
-भाजपा के पास अपने अलावा सहयोगी दलों के सिर्फ 20 और सांसद हैं।

अहम मुद्दे

विपक्ष का सुझाव है कि तीन साल की सजा के प्रावधान पर फिर से विचार हो , मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की राशि देने के लिए सरकारी कोष बने तथा मुस्लिम समाज का पक्ष सुना जाए।
-अभी राज्यसभा में करीब 238 सदस्य हैं।


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