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Sunday, 29 April 2018

विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले, दर्शन को उमड़े हजारों भक्त


विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट आज (सोमवार) सुबह श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। तड़के सवा तीन बजे से मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ कपाट खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गयी थी। ठीक साढ़े चार बजे ब्रह्म मुहुर्त में भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। अब छह महीने बदरीनाथ में भगवान के दर्शन होंगे।




सोमवार तड़के भगवान कुबेर और उद्धव जी ने मंदिर में प्रवेश किया। बदरीनाथ मंदिर के धर्माधिकारी भुवन चंद उनियाल ने बताया कि ब्रह्म मुहुर्त में कपाट खुलने के बाद अगले छह माह तक भगवान की पूजा का अधिकार मनुष्यों को प्राप्त हो जाएगा। रावल ईश्वर प्रसाद नम्बूरी की उपस्थिति में टिहरी नरेश के राजपुरोहित और बामणी गांव के प्रतिनिधि मंदिर का ताला खोला गया। रावल और धर्माधिकारी मंदिर में प्रवेश कर भगवान बदरीविशाल के घृत कंबल का अनावरण किया। विशेष पूजा-अर्चना के बाद चार बजकर 30 मिनट पर भगवान के दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया।

कब क्या हुआ

3.15 बजे मंदिर के कर्मचारी एवं पुलिस-प्रशासन के लोग ड्यूटी पर तैनात किए गए।
3.30 बजे भगवान कुबेर जी दक्षिण द्वार से बामणी गांव के वृत्तिदारों के साथ परिक्रमा परिसर में प्रवेश किया।
3.40 बजे विशिष्ट अतिथि बीआईपी गेट से परिक्रमा परिसर में प्रवेश किया।
3.50 बजे बंदे रावल जी धर्नाधिकारी, वेदपाठी, डिमरी समुदाय के पुजारीगण, टिहरी राज परिवार के पुरोहितों ने उत्तर द्वार से प्रवेश किया।
4.00 बजे बदरीनाथ मंदिर के भीतर पूजन शुरू हो गया, अंदर सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।
4.30 बजे सबसे पहले विशिष्ट अतिथि, अधिकारी एवं मंदिर के जुड़े लोग दर्शन किए। इसके साथ ही आम श्रद्धालुओं के लिए मुख्य कपाट खोल दिए गए।




धरती पर बैकुंठ है श्री बदरीनाथ धाम

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम को पृथ्वी पर भू-बैकुंठ भी कहा जाता है। भारत के चारधामों में एक उत्तर हिमालय में बदरीनाथ धाम को मोक्ष का धाम भी कहा जाता है। इस धाम की विशेषता यह है कि इसे सत युग में मुक्ति प्रदा, त्रेता में योग सिद्धिदा, द्वापर में विशाला ओर कलियुग मे बदरीकाश्रम नाम से पहचान मिली है।

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